प्रबंधन की प्रकृति - nature of management

प्रबंधन की प्रकृति - nature of management


प्रबंधन की प्रकृति के संबंध में एक विवाद यह है कि प्रबंधन विज्ञान है अथवा कला । कुछ प्रबंधन विशेषज्ञ इसे केवल विज्ञान मानते हैं तो कुछ इसे कला की श्रेणी में रखते हैं। यह विवाद बहुत पुराना एवं भ्रमपूर्ण है। प्रबंधन की प्रकृति के इस तथ्य को समझने के लिए सर्वप्रथम विज्ञान एवं कला का अर्थ स्पष्ट कर लेना आवश्यक है। प्रबंधन विज्ञान के रूप में:


विज्ञान वह क्रमबद्ध ज्ञान समूह है जो मनुष्य द्वारा अवलोकन एवं प्रयोगों के आधार पर प्राप्त किया जाता है और जिसको प्रमाणित करना सम्भव है। विज्ञान की मुख्य परिभाषाएँ निम्नलिखित है:


जी. आर. टेरी के शब्दों में विज्ञान किसी तथ्य, विषय या अध्ययन के उद्देश्य का


सामान्य सत्यों की जानकारी के सन्दर्भ में संग्रहीत एवं स्वीकृत क्रमबद्ध ज्ञान है


केन्ज के अनुसारः 'विज्ञान वह क्रमबद्ध ज्ञान-समूह है जो कारण और परिणाम के


एम.बी.ए.


बीच में संबंध स्थापित करता है।


विज्ञान की विशेषताएँ


व्यवस्थित ज्ञान समूह


तथ्यों के संग्रह, विश्लेषण एवं प्रयोगों पर आधारित


सार्वभौमिक प्रयोग


कारण एवं परिणाम


परिणामों की वैधता की जांच एवं पूर्वानुमान सम्भव प्रबंधन में विज्ञान की उपरोक्त सभी विशेषताएँ हैं। किंतु, क्योंकि प्रबंधन एक सामाजिक क्रिया है और मानव संसाधन से चलता है, कारण एवं परिणाम की विशेषता इस पर लागू नहीं होती। अतः प्रबंध पूर्णतः विज्ञान नहीं है।


प्रबंध एक कला के रूप में :


कला का अभिप्राय ज्ञान के सैद्धान्तिक प्रयोग से है। किसी कार्य को सर्वोत्तम विधि से करना ही कला है। कला किसी कार्य को करने की विधि निश्चित करती है और यह बताती है कि उद्देश्यों को कैसे प्राप्त किया जा सकता है। कला एक व्यक्तिगत प्रक्रिया है क्योंकि प्रत्येक कलाकार का काम करने का अपना अलग तरीका होता है। जी. आर. टेरी के अनुसार, "चातुर्य के प्रयोग से इच्छित परिणाम प्राप्त करना ही कला


है।"


कला की विषेशताएँ


व्यक्तिगत कुशलता


व्यावहारिक ज्ञान


सार्थक परिणाम प्राप्ति


अभ्यास द्वारा विकास


रचनात्मक शक्ति ।


निष्कर्ष के रूप में हम कह सकते हैं कि प्रबंधन विज्ञान और कला दोनों हैं।


प्रबंधन के सिद्धांत