प्रदर्शन के आधार पर मुआवजा - performance based compensation

प्रदर्शन के आधार पर मुआवजा - performance based compensation


सर्वप्रथम इंग्लैंड में 1710 में प्रदर्शन पर आधारित मुआवजा की पहचान की गई। कई वर्षो में इस मुआवजा कार्यक्रम का विकास हुआ। मुआवजा से तात्पर्य वेतन के साथ अतिरिक्त लाभ। प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत करना। इस कार्यक्रम के अंतर्गत आता है। प्रदर्शन के आधार पर मुआवजा कार्यक्रम संगठन के उद्देश्य तथा प्रबंधण से संबंधित है। इस कार्यक्रम


के आधार पर कंपनी तीन प्रकार के मुआवजे निर्धारित करती है-


• प्रतिस्पर्धी स्तर।


• प्रतिस्पर्धी स्तर से कम।


• प्रतिस्पर्धी स्तर से अधिक।


इन स्तरों पर मुआवजे प्रदान करने के लिए संगठन द्वारा कर्मचारियों के प्रदर्शन को मापा तथा नियंत्रित किया जाता है।


प्रदर्शन के आधार पर मुआवजे के तत्व निम्नलिखित हो सकते है-


(1) कंपनी के अंश कंपनी के अंशों की संख्या कर्मचारी के प्रदर्शन पर आधारित होती है।


(2) बोनस - प्रतिस्पर्धी स्तर से अधिक कार्य करने पर नकद मुआवजे दिए जा सकते हैं।


(3) लाभ में हिस्सा - मुआवजों के रूप में कई बार संगठन द्वारा लाभों में भागीदारी भी दी जा सकती है।

इस प्रणाली के द्वारा अधिक कार्य करने वाले कर्मचारियों को संगठन में लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है। उनसे इच्छित प्रदर्शन करवाया जा सकता है तथा लागते नियंत्रित की जा सकती है।