उद्देश्यों द्वारा प्रबंधन की प्रक्रिया - process of management by objectives
उद्देश्यों द्वारा प्रबंधन की प्रक्रिया - process of management by objectives
उद्देश्यों द्वारा प्रबंधन की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को निम्न चित्र में दर्शाया गया है :
संस्थागत उद्देश्य निर्धारण: एम.बी.ओ. का प्रथम चरण संस्थागत उद्देश्यों का निर्धारण करना है। प्रत्येक व्यवसाय का मुख्य उद्देश्य व्यवसाय का विकास एवं विस्तार करना होता है। मुख्य उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अनेक सहायक उद्देश्य निश्चित किए जाते हैं। ये उद्देश्य उच्च प्रबन्धकों द्वारा अधीनस्थ प्रबन्धकों की सलाह से निश्चित किए जाते हैं। मुख्य एवं सहायक उद्देश्यों में संस्था द्वारा किये जाने वाले कार्यों का लेखा-जोखा होता है। उद्देश्य निश्चित करते समय ध्यान रखना चाहिए कि ये प्राप्त करने योग्य हों। अर्थात ऐसे उद्देश्य निर्धारित करने चाहिए जिन्हें प्राप्त किया जा सके।
एक बार जब ये उद्देश्य निर्धारित कर लिए जाएं तो इनकी जानकारी उपक्रम में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को दे देनी चाहिए ताकि वे समझ सकें कि जिस उपक्रम के वे अंग हैं, आखिर उसका अंतिम लक्ष्य क्या है।
(ii) मुख्य परिणाम क्षेत्रों का निर्धारण संगठनात्मक उद्देश्यों का निर्धारण करने के बाद मुख्य परिणाम क्षेत्रों का निर्धारण किया जाता है। मुख्य परिणाम क्षेत्रों का अभिप्राय उन क्षेत्रों अथवा क्रियाओं से है जिनमें व्यवसाय के स्वामी विशेष रुचि रखते हैं। ये क्षेत्र ही व्यवसाय की प्राथमिकताओं का निर्धारण करते हैं। संक्षेप में कहा जा सकता है कि ये वे क्षेत्र हैं जहां विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है। प्रायः सभी व्यवसायों में मुख्य परिणाम क्षेत्र इस प्रकार होते हैं - प्रबन्धकों की कार्यकुशलता, लाभदायकता, बाजार साख, सामाजिक दायित्व, वित्तीय साधन आदि ।
(iii) अधीनस्थ उद्देश्य निर्धारण : संस्था के उद्देश्य निर्धारण करने के बाद अधीनस्थ कर्मचारियों के उद्देश्य विभागीय स्तर तथा व्यक्तिगत स्तर पर निश्चित करते समय ध्यान रखना चाहिए कि ये संस्थागत उद्देश्यों से भिन्न न हों। प्रत्येक स्तर पर निश्चित किए जाने वाले उद्देश्यों का अधीनस्थों से विचार विमर्श के बाद ही अंतिम रुप देना चाहिए। इस प्रकार किए गए विचार-विमर्श से अधीनस्थ प्रोत्साहित होते हैं। इस प्रकार से प्रोत्साहित कर्मचारी उद्देश्य प्राप्ति में सहायक होते हैं। इस स्तर पर निर्धारित किए जाने वाले उद्देश्य अल्पकालीन होते हैं। इसी चरण पर अधीनस्थों की सहमति से वास्तविक कार्य के मापदंड भी निश्चित कर दिये जाते हैं।
(iv) सामयिक बैठक एम.बी.ओ. प्रक्रिया के इस चरण में वरिष्ठ एवं अधिनस्थ समय-समय पर इकट्ठे बैठकर देखते हैं
कि वांछित कार्य प्रगति प्राप्त हो रही है या नहीं। यदि नहीं तो उसके क्या कारण है और उनका समाधान क्या होगा। सामयिक सभाएँ थोड़े-थोड़े समय के बाद लगातार की जाती हैं। इनका उद्देश्य संगठन की कमजोरियों का समय पर पता लगाना है ताकि तुरन्त सुधारात्मक कार्यविधि करके संभावित हानि से बचा जा सके। यहां पर विशेष बात यह है कि सामयिक सभाओं का उद्देश्य कम काम करने वालों को सजा देना तथा अधिक काम करने वालों को ईनाम देना नहीं है।
यह तो एम.बी.ओ. अवधाराणा का एक मुख्य हिस्सा है और इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि काम नियोजित ढंग से चल रहा है और संस्था के उद्देश्यों को प्राप्त कर लिया जाएगा।
सामयिक सभाओं से कर्मचारीयों में ऐसा संदेश जाता है कि उनका बॉस उनके काम में रुचि ले रहा है। इससे कर्मचारियों के मनोबल में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त सामयिक सभाओं से उद्देश्यों की प्राप्ति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
(v) अंतिम निष्पादन मूल्यांकन एक निश्चित समय के अंत में पूर्व निर्धारित मापदंडों के आधार पर अधीनस्थों के वास्तविक कार्य का मूल्यांकन किया जाता है। कार्य मूल्यांकन के आधार पर विचलनों का पता लगाया जाता है जो कर्मचारी अपने उद्देश्यों का प्रभावपूर्ण ढंग से पूरा नहीं कर पाते उनके लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती हैं ताकि वे भविष्य में अच्छा कार्य कर सकें। एक लगातार चलने वाले व्यवसाय में उद्देश्यों को बार-बार दोहराया जाता है। जैसे ही एक सत्र का काम पूरा होता है फिर अगले सत्र के लिए प्रक्रिया का पालन करना होता है।
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