नियोजन एवं नियंत्रण में संबंध - relationship between planning and control

नियोजन एवं नियंत्रण में संबंध - relationship between planning and control


नियोजन एवं नियंत्रण के संबंध में निम्नलिखित दो भागों में विभक्त किया जा सकता है:


(क) नियोजन एवं नियंत्रण की एक-दूसरे कर निर्भरता


(ख) नियोजन एवं नियंत्रण में विभिन्नता


(क) नियोजन नियंत्रण की एक-दूसरे पर निर्भरता प्रबंधन के नियोजन एवं नियंत्रण कार्यों में गहरा संबंध है। इनके संबंध के महत्व को दर्शाते हुए प्रायः कहा जाता है।

कि नियोजन, नियंत्रण के अभाव में अंधा है। नियोजन एवं नियंत्रण की एक-दूसरे पर निर्भरता के दोनों पहलुओं की व्याख्या निम्नलिखित है:


(1) नियोजन एवं नियंत्रण के अभाव में अर्थहीन है: नियोजन एवं नियंत्रण की निर्भरता के पहले भाग में कहा गया है कि नियोजन तभी सफल होता है जबकि एवं नियंत्रण विद्यमान हो अर्थात यदि नियंत्रण विद्यमान न हो तो नियोजन किया जाना व्यर्थ है।


यदि प्रबंधन में से नियंत्रण प्रक्रिया को अलग कर दिया जाए तो संस्था में कार्यरत कोई भी कर्मचारी योजनाओं के अनुरुप काम करने की बात को गंभीरता से नहीं लेगा और परिणामतः योजनाएं असफल हो जाएंगी।


(ii) नियंत्रण, नियोजन के अभाव में अंधा है: नियंत्रण के अंतर्गत वास्तविक कार्य निष्पादन की तुलना प्रमापों से की जाती है। अतः यदि प्रमाप निश्चित न किए जाएं तो नियंत्रण का औचित्य ही समाप्त हो जाएगा और प्रमाप नियोजन के अंतर्गत ही निश्चित किए जाते है। इसीलिए कहा जाता है कि नियंत्रण नियोजन के अभाव में अंधा अथवा आधारहीन होता है।


(ख) नियोजन एवं नियंत्रण में विभिन्नताः यह ठीक है कि नियोजन एवं नियंत्रण एक-दूसरे के बिना अपूर्ण एवं प्रभावहीन हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नही है कि इनके बीच कोई अंतर नहीं है। इनके बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:


(1) नियोजन आगे देखता है जबकि नियंत्रण पीछे देखना योजनाएं हमेशा भविष्य के लिए बनाई जाती हैं और निश्चित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए भविष्य में की जाने वाली कार्यवाही को निर्धारित करती हैं। इसके विपरीत नियंत्रण को पीछे देखने की प्रक्रिया कहा जाता है क्योंकि इसके अंतर्गत प्रबधंक कुछ कार्य पूरा हो जाने के बाद ही यदि देखते हैं कि कार्य प्रमापों के अनुसार हुआ अथवा नहीं। अतः स्पष्ट है कि नियोजन आगे अर्थात भविष्य में देखता हैं और नियंत्रण पीछे अथार्त भूतकाल में देखता है। लेकिन नियोजन एवं नियंत्रण के अंतर को उपरोक्त तथ्य के विपरीत करके भी कहा जा सकता है अर्थात नियोजन पीछे देखना, जबकि नियंत्रण आगे देखना नियोजन को पीछे देखना इसलिए कहा जा सकता है

क्योंकि योजनाओं का निर्माण भूतकाल में हुई घटनाओं अथवा प्राप्त अनुभवों के आधार पर ही किया जाता है। दूसरी ओर नियंत्रण भूतकाल में किये गये कार्य का मूयांकन करता तो है लेकिन इसमें सुधारात्मक कार्यवाही भविष्य के लिए की जाती है। अतः यह कहने में भी कोई संकोच नही होना चाहिए कि नियोजन पीछे देखना है जबकि नियंत्रण आगे देखना ।


(ii) नियोजन प्रबंधकीय प्रक्रिया का पहला कार्य है तथा नियंत्रण अंतिमः प्रबंधकीय प्रक्रिया एक निश्चित क्रम में चलती हैं, जैसे- नियोजन, संगठन, नियुक्तियां एवं नियंत्रण इस क्रम से स्पष्ट होता है कि नियोजन प्रबंधकीय प्रक्रिया का प्रथम कदम है जबकि नियंत्रण अंतिम ।