प्रत्यायोजन के प्रकार - types of delegation

प्रत्यायोजन के प्रकार - types of delegation


अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से प्रत्यायोजन अथवा भारार्पण को विभिन्न आधारों पर निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है :-


विशिष्ट तथा सामान्य भारार्पण


लिखित तथा मौखिक भारार्पण।


औपचारिक तथा अनौपचारिक भारार्पण


अधोगामी, ऊर्ध्वगामी एवं समपार्श्विक भारार्पण ।


प्रशासनिक, क्रियात्मक, भौगोलिक एवं तकनीकी भारार्पण।


(क) विशिष्ट तथा सामन्य भारार्पण सामान्य भारार्पण के अंतर्गत किसी विभाग की समस्त क्रियाओं का कार्यभार किसी एक व्यक्ति को सौंप दिया जाता है। उदाहरण के लिए. किसी उपक्रम के जनरल मैनेजर को सौंपा गया कार्यभार सामान्य भारार्पण के अंतर्गत आता है। इसके विपरीत जब किसी व्यक्ति को निश्चित कार्य भार सौंप दिया जाता है तो वह विशिष्ट कहलाता है, जैसे क्रय प्रबंधक आदि को सौंपे गए कार्यभार


(ख) लिखित तथा मौखिक भारार्पण लिखित रूप में सौंपे गए कार्यभार को लिखित भारार्पण' कहते हैं। इसके विपरीत जब मौखिक रुप से ही भारार्पण किया जाता है. तो वह मौखिक भारार्पण कहलाता है। मौखिक भारार्पण की तुलना में लिखित भारार्पण अधिक निश्चित होता है।


(TT) औपचारिक तथा अनौपचारिक भारार्पण सामान्य भारार्पण का स्वरुप औपचारिक होता है । औपचारिक भारार्पण संगठन की अधिकार रेखाओं द्वारा निर्धारित सीमाओं के आधार पर होता है। इन सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है, इसके विपरीत, अनौपचारिक भारार्पण के अंतर्गत अधीनस्थ कर्मचारी उच्च अधिकारियों की आज्ञा पूरी नहीं, अपितु स्वतः प्रेरणा से कार्य करते हैं। इसका उद्देश्य लालफीताशाही को काटकर समय की बचत करना होता है। सार्वजनिक उद्योगों में लालफीताशाही का बोलबाला होता है, क्योंकि वहां पर केवल औपचारिक विधियों से ही भारर्पण होता हैं, जबकि निजी उद्योगों में औपचारिक तथा अनौपचारिक दोनों ही विधियों से भारार्पण होता है जिसके कारण लालफीताशाही की आशंका नहीं रहती।


(ET)


अधोगामी उर्ध्वगामी एवं समपाश्विक भारार्पण अधिकांश भारार्पण अधेगामी होते हैं. क्योंकि उच्च अधिकारी अपने से निम्न अधिकारी को कार्य भार सौंपता है। लेकिन कभी-कभी एक अधिकारी के द्वारा अपने से उच्च अधिकारी को भी भारार्पण किया जा सकता है। इस प्रकार का भारार्पण उर्ध्वगामी भारार्पण कहलाता है। कभी-कभी समस्तरीय भारार्पण भी हो सकते हैं इसे समपाश्विक भारार्पण कहते हैं। अनौपचारिक भारार्पण पाश्विक भी हो सकता है। जब कार्य संपादन के लिए समस्तरीय अधिकारी की सहायता प्राप्त करना आवश्यक हो तो इस प्रकार के भारार्पण की आवश्यता उत्पन्न होती है। वर्तमान समय में बहुत कम कार्य स्वतंत्र (बिना अन्य व्यक्तियों के सहयोग प्राप्त किए हुए) रुप से पूरे किए जा सकते हैं। अतः इस प्रकार के भारार्पण का महत्व कार्यों की जटिलताओं एवं उनके परंपरावलंबी होने के कारण बढ़ता जा रहा है।


(ङ) प्रशासनिक, क्रियात्मक, भौगोलिक एवं तकनीकी भारार्पण: जब केवल प्रशासकीय कार्यों का ही प्रत्यायोजन किया जाता है तो उसे प्रशासकीय भारार्पण कहते हैं। ऐसे प्रत्यायोजन में कोई समस्या पैदा नहीं होती क्योंकि प्रशासकीय कार्य अधिकांशतः दैनिक प्रकृति के होते हैं। जब प्रत्यायोजन क्रियाओं के आधार पर किया जाता है, जैसे- क्रय विक्रय, विपणन, वित्त, विज्ञापन आदि तो उसे क्रियात्मक या कार्यकारी प्रत्यायोजन कहते हैं। वृहत व्यवसायिक गृहों में, जब कारोबार देशव्यापी होता है, तो प्रबंधकीय अधिकारों व शक्तियों को क्षेत्रीय प्रबंधाधिकारियों को सौंप देते हैं. जैसे- जीवन बीमा निगम के क्षेत्रिय कार्यालय। इस प्रकार का भारार्पण प्रधान कार्यालय को प्रभावशाली प्रबंधन संपन्न करने में सहायता प्रदान करता है। जब विविध प्रकार के तकनीकी कार्यों का भारार्पण किया जाता है (जैसे- मोटर इंजन बनाना, पेंटिंग करना, बॉडी मेंकिंग इत्यादि) तो इसे तकनीकी प्रत्यायोजन कहते हैं। यह वास्तव में क्रियात्मक भारर्पण) ही है।