योजनाओं के प्रकार - types of plans
योजनाओं के प्रकार - types of plans
प्रकृति के आधार
(1) प्रशासकीय योजनाएं दीर्घकालीन उद्देश्यों, संस्था की व्यापक रणनीति और इसके आधारभूत निर्णय पर आधारित योजनाएं जो व्यवसाय के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रभावित करती हैं, प्रशासकीय या कार्यनीति संबंधी योजनायें कहलाती हैं। प्रशासकीय योजनाओं से संस्था की प्रकृति एवं स्वरुप के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो जाती है।
(2) परिचालन या क्रियात्मक योजानाएं: परिचालन योजनाएं संस्था की रणनीति संबंधी योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए चालू व्यवसायिक कार्यवाहियों को अल्पकालीन व्यावहारिक योजनाओं के ताने-बाने में बुनने के लिए मध्यस्तरीय एवं निम्नस्तरीय प्रबंधकों द्वारा बनाई जाती हैं।
परिचालन योजनाएं वर्तमान बाजारों, वर्तमान क्रियाओं, वर्तमान उपभोक्ताओं एवं वर्तमान सुविधाओं के साथ भावी नियोजन होता है। उत्पादन, विपणन, एवं वित्तीय विभागों के दैनिक कार्यों को पूरा करने के लिए परिचालन योजनाएं बनाना पड़ता हैं। प्रबंध के स्तर के आधार पर
(ii) (अ) उच्चस्तरीय योजना यह योजना उच्च प्रबंधकों द्वारा (जैसे- जनरल मैनेजर द्वारा ) तैयार की जाती है इसके अंतर्गत उपक्रम की सामान्य नीति, उद्देश्य, लक्ष्य, बजट आदि तैयार किए जाते हैं।
(ब) मध्यस्तरीय योजनाः यह मध्यस्तरीय प्रबंधकों द्वारा तैयार की जाती है।
ये योजनाएं युक्तियों के रूप में तैयार की जाती हैं, जिनसे उपक्रम के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों की पूर्ति करना संभव होता है।
(ग) निम्नस्तरीय योजना यह योजना पर्यवेक्षकों द्वारा तैयार की जाती है तथा उपक्रम के कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली क्रियाओं से संबंध रखती हैं। व्यापकता के आधार पर
(iii) (अ) समामेलित योजनाएं जो किसी कंपनी के सभी विभागों के विकास एवं विस्तार के लिए उद्यमियों व उच्च प्रबंधकों द्वारा स्वयं दीर्घकालीन रणनीति को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।
(ब) विभागीय योजनाएं जो भिन्न-भिन्न विभागों जैसे उत्पादन, विपणन, वित्त कर्मचारी के द्वारा अपने तत्कालीन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए बनाई जाती है। ये विस्तृत योजना के उद्देश्यों के अनुरुप तैयार की जाती हैं।
(iv) समय के आधार पर
(अ) दीर्घकालीन योजनाएं पीटर एफ. ड्रकर के शब्दों में 'दीर्घकालीन नियोजन व्यवस्थित ढंग से वर्तमान व्यावसायिक निर्णयों को (मुख्यतः जोखिम युक्त) उनके भविष्य के संबंध में सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों द्वारा लेने, उन निर्णयों को क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक प्रयासों को व्यवस्थित ढंग से संगठित करने एवं इन निर्णयों के परिणामों के अनुमान की तुलना में व्यवस्थित संप्रेषण व्यवस्था द्वारा मापन करने की एक गतिशील प्रक्रिया है"।
दीर्घकालीन नियोजन प्रायः निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ती के लिए किया जाता है:
(1) पूंजीगत संपत्तियों की व्यवस्था के लिए.
(2) किसी नवीन पूंजीगत योजना को कार्यान्वित करने के लिए,
(3) विवेकीकरण या वैज्ञानिक प्रबंध की किसी योजना के लिए,
(4) कुशल कर्मचारियों की व्यवस्था के लिए,
(5) नवीन इकाइयों में समन्वय के लिए,
(6) स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए,
(7) जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों पर रोक लगाने के लिए,
(8) उपक्रम के संपूर्ण कार्य निष्पादन के मापन के लिए तथा मापदण्ड प्रस्तुत करने के लिए।
(ब) अल्पकालीन योजनाएं ये योजनाएं एक वर्ष या इससे कम अवधि के लिए तत्कालीन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मध्यस्तरीय तथा निम्नस्तरीय प्रबंधकों के द्वारा स्वयं बनाई जाती हैं। लेकिन इन योजनाओं का भी दीर्घकालीन योजनाओं की रुपरेखा के अनुसार होना आवश्यक है। एक वर्ष से कम की अवधि वाली योजनाओं को प्रायः अल्पकालीन योजनाएं कहते हैं।
(v) उपयोग के आधार पर
उपयोग के आधार पर योजनाएं निम्न दो प्रकार की होती हैं-
(1) स्थायी या निरंतर उपयोग की योजनाएं :
जो योजनाएं किसी व्यवसायिक संस्था में स्थायी रूप से भिन्न-भिन्न स्तरों पर बनाई जाती हैं, अर्थात बार-बार उपयोग करने लिए बनाई जाती हैं, उन्हें स्थायी योजनाएं कहते हैं। इन योजनाओं का प्रयोग तब-तब किया जाता है जब-जब इनकी अवश्यकता पड़ती है। इन योजनाओं के प्रमुख उदाहरण में संस्था के उद्देश्य नीतियां, कार्यविधि नियम और कार्यनीति उल्लेखनीय हैं।
(2) तदर्थ या एकल उपयोग की योजनाएं: जब कोई योजना किसी विशेष परिस्थिति में किसी विशेष उद्देश्य की प्राप्ति के लिए बनाई जाती हैं, तब उसे तदर्थ या एकल उपयोग की योजना कहते हैं। इन योजनाओं का प्रयोग अनावर्तक कार्यों के लिए तथा तत्कालीन उपयोग के लिए किया जाता है। एकल उपयोग की योजना में कार्यक्रम, बजट और परियोजनाएं शामिल हैं। उद्देश्य की पूर्ति के पश्चात ये योजनाएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।
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