मजदूरी में भिन्नता - variation in wages

मजदूरी में भिन्नता - variation in wages


विभिन्न व्यवसायों में एक ही प्रकार के कार्य करने वाले श्रमिकों की मजदूरी में भिन्नताएं देखने में आती हैं।


इस मजदूरी की भिन्नताओं के निम्नलिखित कारण हैं:


(क) कार्य क्षमताओं में अंतर- मजदूरों की कार्यक्षमता का मजदूरी की दर पर अत्यधिक प्रभाव पडता है। अतः अधिक कार्य क्षमता वाले श्रमिकों का उन श्रमिकों से अधिक मजदूरी प्रदान की जाती है जिसकी कार्य क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।


(ख) रोजगार की नियमितता - जिन व्यवसायों में कार्य निरन्तर व नियमित रूप से चलता रहता है

वहां श्रमिकों को उन मजदूरों से अपेक्षाकृत कम मजदूरी प्रदान की जाती है जहां कार्य अस्थायी एवं अनिश्चित होता है।


(ग) स्थान विशेष पर द्रव्य की क्रय शक्ति- जिन स्थानों पर द्रव्य की क्रय शक्ति कम होती है अर्थात् वस्तुओं व सेवाओं के मूल्य अधिक होते है वहां श्रमिकों को आकर्षित करने के लिए अधिक मजदूरी दी जाती है। इसी कारण महानगरों में सामान्य नगरों की अपेक्षा मजदूरों को अधिक मजदूरी दी जाती हैं।


(घ) कार्य का स्वभाव- सरल, रूचिकर, स्वास्थ्यकर व सम्मानित कार्यों के लिए कम मजदूरी प्रदान की जाती है,

जबकि अरूचिकर, घृणित एवं जोखिम वाले व्यवसायों में मजदूरी की दर अधिक होती है।


(ङ) प्रशिक्षण व्यय - जिन व्यवसायों को सीखने में कम व्यय तथा कम लागत लगता है, उन व्यवसायों में मजदूरी की दर कम होती है। इसके विपरीत, जिन व्यवसायों के प्रशिक्षण में समय तथा व्यय अधिक होता है उन व्यवसायों में मजदूरी अधिक प्रदान की जाती है। यही कारण है कि डाक्टर तथा इंजीनियर को एक अध्यापक की अपेक्षा अधिक मजदूरी दी जाती है।


(च) नौकरी की सुरक्षा एवं पदोन्नति की आशा- निजी व्यवसाय की अपेक्षा सरकारी नौकरी में व्यक्ति कम वेतन लेने पर ही उद्यत हो जाते हैं

क्योंकि सरकारी नौकरी में निजी व्यवसाय की अपेक्षा नौकरी की अधिक सुरक्षा होती है।


(छ) गतिशीलता का अभाव - कभी-कभी श्रमिक सामाजिक तथा आर्थिक परिस्थितियों के कारण ऐसे स्थानों पर पहुंचने में असमर्थ रहते हैं जहां उन्हें अधिक मजदूरी प्राप्त हो सकती है और वे अपने ही स्थान पर कम मजदूरी पर कार्य करते हैं।


(ज) अतिरिक्त सुविधाएं जिन व्यवसायों में कर्मचारी को नकद मजदूरी के अतिरिक्त अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं उदाहरणार्थ, मकान की सुविधा, निःशुल्क डॉक्टरी सहायता आदि वहां नकद मजदूरी प्रायः कम दी जाती है।


(झ) कार्य के घंटे व अवकाश जिन व्यवसायों में कर्मचारी को अधिक समय तक कार्य करना पड़ता है व अवकाश भी कम मिलता है वहां मजदूरी अधिक प्रदान की जाती है किंतु उन व्यवसायों में जहां कार्य अपेक्षाकृत कम समय तक करना पड़ता है एवं छुट्टियां भी अधिक प्राप्त होती हैं वहां मजदूरी कम प्रदान की जाती है। इसी आधार पर एक बैंक के क्लर्क को एक स्कूल के क्लर्क की अपेक्षा अधिक वेतन प्राप्त होता है।


(ञ) कार्य की विश्वसनीयता - जिन व्यवसायों में ईमानदारी तथा विश्वास का विशेष महत्व है

उनमें प्रायः ऊँचे वेतन ही दिये जाते हैं। इसी कारण एक बैंक मैनेजर तथा न्याययधीश को ऊँचा वेतन दिया जाता है।


(ट) श्रमिकों की मोलभाव करने की शक्ति- जिन व्यवसायों में श्रमिकों का संगठन सुदृढ होता है वहां के श्रमिकों में मोलभाव करने की शक्ति अधिक होती है। अतः वे अपेक्षाकृत अधिक मजदूरी प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं। प्रायः बड़े उद्योगों में संगठित श्रम संघ होने के कारण श्रमिक ऊँची मजदूरी प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं जबकि छोटे उद्योगों में असंगठित श्रम के कारण श्रमिक कम मजदूरी पर ही कार्य करते रहते हैं।