गुप्तकालीन स्थापत्य कला मंदिर(2) - Gupta Architecture Temple(2)
गुप्तकालीन स्थापत्य कला मंदिर(2) - Gupta Architecture Temple(2)
5. भूमरा का शिव मंदिर
जबलपुर- इटारसी रेलमार्ग पर स्थित उंचहरा रेलवे स्टेशन से छः मील पर स्थित भूमरा नामक स्थान में एक शिव मंदिर है, जो मूलतः वर्गाकार 35 फुट का था; उसके सामने 29 फुट 19 इंच लंबा और 13 फुट चौडा मंडप था। मंडप के सामने बीच में 11 फुट तीन इंच लंबी और 8 फुट 5 इंच चौड़ी सीढ़ियाँ थीं। सीढ़ियों के दोनों ओर 8 फुट 2 इंच लंबी और 5 फुट आठ इंच चौड़ी एक-एक कोठरी थी। मंडप के सामने मूल वास्तु के भीतर बीच में साढ़े पंद्रह फुट का वर्गाकार लाल पत्थर का सपाट छतवाला गर्भगृह था गर्भगृह के चारों ओर ढका प्रदक्षिणा पथ रहा होगा,
किंतु उसका कोई चिह्न अवशिष्ट नहीं है, उसका अनुमान नचनाकुठारा के मंदिर के आधार पर किया जाता है। गर्भगृह के द्वार के बाजू अलंकरण के तीन पट्टियों से सजे हुए हैं। भीतरी और बाहरी पट्टी की ज्यामितिक और पुष्प का अलंकरण ऊपर सिरदल पर भी फैला हुआ है। सिरदल के बीच में शिव की भव्य मूर्ति है। बाजुओं के नीचे गंगा और यमुना का अंकन हुआ है। छत, पत्थर की बड़ी-बड़ी पटियों से बना था। दीवार बिना जुड़ाई के पत्थर के गढ़े हुए पत्थर रख कर बनायी गयी थी। मंडप के स्तंभ और द्वार के अवशेष सफाई करने पर मलबे में प्राप्त हुए थे। वे भी काफी अलंकृत हैं।
6. नचना कुठारा का पार्वती मंदिर
भूमरा से दस मील पर अजयगढ़ के निकट स्थित नचना कुठारा में एक मंदिर है जिसे कनिंघम ने पार्वती मंदिर का नाम दिया है। राखालदास बनर्जी उसे शिव मंदिर कहते हैं। यह मंदिर अपने मूल रूप में बहुत कुछ सुरक्षित है और भू-योजना में भूमरा के मंदिर के समान ही है। इस मंदिर का गर्भगृह भीतर से वर्गाकार 8 फुट और बाहर से 15 फुट है। इसी प्रकार प्रदक्षिणा पथ भीतर से 26 फुट और बाहर से 33 फुट है। इसके सामने का मंडप 26 फुट लंबा और 12 फुट चौडा है। उसके सामने बीच में 18 फुट लंबी और 10 फुट चौड़ी सीढ़ी है।
गर्भगृह की छत सपाट है और उसके ऊपर एक और कोठरी है जो बाहर- भीतर से एकदम साधारण है, किंतु उसमें जाने के लिए किसी सीढ़ी का पता नहीं चलता। इस कोठरी की भी छत सपाट है। गर्भगृह में प्रकाश जाने के लिए अगलबगल की दीवारों में एक-एक झरोखे हैं जिनमें चैपहल छेद हैं। इसी प्रकार का झरोखा बाहरी दीवारों में भी है। इसका द्वार अंय मंदिरों के द्वारों की अपेक्षा कुछ अधिक अलंकृत है। उसके बाजुओं पर मिथुनों का अंकन हुआ है और निचले भाग में एक ओर गंगा और दूसरी ओर यमुना का अंकन है। प्रदक्षिणापथ की बाहरी दीवार तीन ओर बीच में कुछ आगे को निकली हुई है।
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