आरण्यक - Aranyak
आरण्यक - Aranyak
प्राचीन भारत में यज्ञों की प्रधानता के कारण याज्ञिक अनुष्ठानों के प्रतिपादन के लिए ब्राह्मण ग्रंथों की रचना की गई थी। इसके साथ ही, ऋषि मुनि आध्यात्मिक, दार्शनिक व पारलौकिक विषयों का भी चिंतन किया करते थे। आत्मा क्या है, सृष्टि की उत्पत्ति, सृष्टि के तत्व व कर्ता, उसके स्वरूप आदि पर विचार भी किया जाता था। इन गूढ़ विषयों का चिंतन करने के लिए ऋषि मुनि प्रायः जंगलों या अरण्यों में निवास करते थे। वहीं जिस साहित्य की रचना हुई, उसे आरण्यक कहते हैं। आम तौर पर ये वन पुस्तक' कहे जाते हैं। ये मुख्यतः दर्शन और रहस्यवाद से संबंधित हैं। ये ब्राह्मण ग्रंथों के दार्शनिक भाग हैं।
वार्तालाप में शामिल हों