भारत सुमात्रा संबंध - Bharat Sumatra Relations
भारत सुमात्रा संबंध - Bharat Sumatra Relations
हिंद महासागर में सुमात्रा नाम का एक विशाल द्वीप है। भारतवर्ष और चीन के मध्य के जलमार्ग पर यह अवस्थित है। चतुर्थ शताब्दी ई. में सुमात्रा में श्रीविजय की स्थापना हुई थी। श्रीविजय नगर कंपर नदी के तट पर बसा था। यह उस समय राजनैतिक गतिविधियों का केंद्र हो गया था। यह हिंदू शिक्षा और संस्कृति का भी महान् केंद्र था। चीन से भारत जाने वाले यात्री यहाँ संस्कृत और अंय भारतीय भाषायें सीखते थे । इत्सिंग (688-695 ई.) ने यहाँ सात वर्ष तक संस्कृत भाषा का अध्ययन किया था।
सातवीं शताब्दी ई. में श्रीविजय साम्राज्य ने बहुत अधिक उन्नति की।
यहाँ के राजाओं ने शैलेंद्र (पर्वतों के अधिराज) की उपाधि धारण की थी। आठवीं शताब्दी ई. में शैलेंद्र राजाओं का साम्राज्य चरम उन्नति पर था। सुमात्रा, जावा, बाली, बोर्नियों और अनेक छोटे-बड़े पूर्वी द्वीपों पर उनका राज्य स्थापित था। कुछ समय के लिए इन्होंने कंबुज पर अधिकार करके चंपा पर अधिकार किया था।
शैलेंद्र राजा बौद्ध थे। चीन के साथ और भारतवर्ष के चोल तथा पालवंशी राजाओं के साथ इनके दौत्य संबंधथे। चोल राजाओं के साथ इनके नौ-युद्ध भी हुए चोल राजाओं द्वारा लंका पर आक्रमण करने पर इन्होंने लंका की सहायता की। शैलेंद्र राजाओं ने सुमात्रा में अनेक मंदिरों का निर्माण कराया।
वार्तालाप में शामिल हों