भारत वर्मा संबंध - Bharat Verma Relations

भारत वर्मा संबंध - Bharat Verma Relations


भारतीय इतिहास और लोक कथाओं में वर्णित ब्रह्मदेश आधुनिक बर्मा को ही कहा गया है। बर्मा की कथाओं के अनुसार कपिलवस्तु के शाक्य गण का एक राजकुमार सेना के साथ उत्तरी बर्मा गया। उसने संकिरम को राजधानी बनाकर एक राज्य की स्थापना की। इस वंश के राजा इक्कीस पीढ़ियों तक राज्य करते रहे। उसके बाद गंगा की घाटियों से आये क्षत्रियों के एक गण ने सोलह पीढ़ियों तक राज्य किया।


इसके बाद इन राजाओं ने श्रीक्षेत्र को अपनी राजधानी बनाया। यह राजवंश प्यू कहलाता था। तीसरी शताब्दी ई. में इस राजवंश का राज्य इरावदी की घाटी में विस्तृत था।

नवीं शताब्दी ई. तक यह राजवंश शक्तिशाली बना रहा। इसके राज्य का विस्तार उत्तर से दक्षिण में 700-800 मील और पूर्व से पश्चिम में 500 मील तक विस्तृत था। नवीं शताब्दी ई. में थाई राजा ने आक्रमण करके इसकी राजधानी को नष्ट कर दिया। इसके बाद उत्तर में प्रेमों और दक्षिण में मोनों (तेलंगों) के आक्रमणों ने इस राजवंश को बिल्कुल समाप्त कर दिया।


बर्मा के दक्षिणी भाग में मोन (तेलंग) राज्य करते थे। संभवतः वे भारत के तेलंगाना क्षेत्र से आये थे। अतः वे तेलंग कहलाते थे। इनका प्रदेश रमन्न देश के नाम से प्रसिद्ध था।

सातवीं शताब्दी में यह एक शक्तिशाली हिंदूराज्य था। इसकी सीमायें स्याम और पश्चिमी लाओस तक विस्तृत थीं।


बर्मा के राजनैतिक इतिहास में ग्रम्म (मिम्म) जाति का स्थान महत्वपूर्ण है। इसका बर्मा में आगमन नव-दसवीं शताब्दी ई. में हुआ। उन्होंने बर्मा में रहने वाले हिंदुओं के प्रभाव में आकर हिंदू धर्म स्वीकार किया और एक शक्तिशाली राज्य की स्थापना की। इसकी राजधानी पागान थी। हिंदू साहित्य के अनुसार इनके राज्य का नाम ताम्रद्वीप और राजधानी का नाम अरिमर्दनपुर था।


प्रम्म राजाओं में अनिरुद्ध नाम महत्वपूर्ण है।

इसका राज्य काल 1044-1077 ई. रहा। इस समय उत्तरी बर्मा में एक विकृत तांत्रिक मत का प्रसार हो रहा था। भिक्षु अर्हन् ने, जो कि धर्मदर्शी के नाम से प्रसिद्ध थे, अनिरुद्ध को विशुद्ध थेरवाद की शिक्षा दी। इन दोनों ने बौद्ध धर्म में सुधार करके हीनयान संप्रदाय का प्रचार किया।


अनिरुद्ध ने अनेक बौद्ध विहारों और पगोडाओं का निर्माण कराया। वह एक शक्तिशाली राजा था। उसने दक्षिण के मोनों पर पूर्ण विजय प्राप्त की और थेरवाद का प्रचार किया।

दक्षिण से लौटते हुए उसने प्यू राजधानी श्रीक्षेत्र की दीवारों को तुड़वाकर वहाँ पगोडा बनवाये। अनिरुद्ध ने स्याम को भी करारी हार दी। अराकान और शान रियासतों को जीतकर उसने अपने राज्य में मिला लिया। इस प्रकार उसने लगभग सारे ही बर्मा को जीतकर एक विशाल राज्य को संगठित किया।


अनिरुद्ध ने एक भारतीय राजकुमारी से विवाह किया था। उसने चोल राजा के आक्रमण के विरुद्ध लंका को सहायता दी और बदले में भगवान बुद्ध के दो दाँत प्राप्त किये। इनके लिए उसने प्रसिद्ध शेवजिगोन पगोडा का निर्माण कराया।