ब्राह्मण ग्रंथ - Brahmin book

ब्राह्मण ग्रंथ - Brahmin book


वैदिक साहित्य में चार वैदिक संहिताओं के अतिरिक्त ब्राह्मण ग्रंथों को भी सम्मिलित किया जाता है। ये संसार में स्तुति के प्रथम उदाहरण हैं। इन ग्रंथों में उन अनुष्ठानों का विषद रूप से वर्णन है, जिनमें वैदिक मंत्रों को प्रयुक्त किया जाता है। ये यज्ञों का अर्थ बताते हुए उनके अनुष्ठान की रीति भी बताते हैं। प्रत्येक ब्राह्मण ग्रंथ का किसी वेद के साथ संबंध है और उसे उसी वेद का ब्राह्मण माना जाता है।


ऋग्वेद का प्रधान ब्राह्मण ग्रंथ ऐतरेय है एवं दूसरा ब्राह्मण ग्रंथ कौषीतकि या सांख्यायन ब्राह्मण है। कृष्ण यजुर्वेद का ब्राह्मण तैत्तिरीय है। शुक्ल और कृष्ण यजुर्वेद में मुख्य भेद यह है कि जहाँ शुक्ल यजुर्वेद में केवल मंत्र भाग हैं, वहाँ कृष्ण यजुर्वेद में ब्राह्मण भाग भी आता है। शुक्ल यजुर्वेद का ब्राह्मण शतपथ हैं, जो एक विशाल ग्रंथ है। इसके रचयिता याज्ञवल्क्य ऋषि माने जाते हैं। इनमें अनुष्ठानों के प्रयोजन का वर्णन भी किया गया है। सामवेद के तीन ब्राह्मण हैं, ताण्ड्य (Tandya) महाब्राह्मण, षडविंश (Sadvimsha) ब्राह्मण और जैमिनीय ब्राह्मणा अथर्ववेद का ब्राह्मण गोपथ है।