जाति - Caste

जाति - Caste


हिंदुओं की जाति प्रथा का वर्तमान रूप उत्तर वैदिक काल और महाकाव्यों के काल में विकसित हुआ है, अतएव जाति प्रथा 2500 वर्ष से भी अधिक प्राचीनतम है। कालांतर में यह प्रथा अधिक जटिल हो गयी और इसने हिंदू समाज को तीन हजार से अधिक जातियों और उप जातियों के टुकड़ों में विभक्त कर दिया। प्रसिद्ध इतिहासकार स्मिथ के मतानुसार जाति उन परिवारों का एक समूह है

जो धार्मिक क्रिया- विधि की विशुद्धता को विशेष करने खान-पान और वैवाहिक संबंधकी पवित्रता के विशिष्ट नियमों को पालन से परस्पर संगठित हैं। सर हर्बर्ट रिजले का मत है कि "जाति परिवारों के संगठन या समूह को कहते हैं। उस समूह के सदस्यों का एक ही नाम होता है जो किसी ईश्वरीय या महान मानवीय अस्तित्व से संबंधित होता है। उनका एक ही व्यवसाय होता है और योग्य व्यक्तियों के विचारानुसार वे एक संयुक्त समुदाय है।” डॉ. शाम शास्त्री का कथन है कि “आहार और विवाह संबंधी सामाजिक पृथकत्व को ही जाति कहते हैं।"