गंधार तथा मथुरा की बुद्ध प्रतिमाओं की तुलना - Comparison of Buddha statues of Gandhara and Mathura
गंधार तथा मथुरा की बुद्ध प्रतिमाओं की तुलना - Comparison of Buddha statues of Gandhara and Mathura
गंधार की बुद्ध प्रतिमा की तुलना यदि मथुरा की बुद्ध प्रतिमा से की जायें तो दोनों में निम्नलिखित भेद दिखाई देते हैं- (1) पहला भेद मूर्ति के माध्यम या पत्थर का है। गंधार की मूर्तियाँ भूरे रंग के परतदार पत्थर में या मसाले से बनी हुई हैं। मथुरा की मूर्तियाँ सफेद चित्तियों वाले लाल पत्थर से बनाई गई हैं। (2) गंधार की मूर्तियों का सिर घुँघराले वालों से ढका है, मथुरा में बुद्ध का सिर मुण्डा हुआ है।
(3) गंधार में सिर पर उष्णीष और मस्तक पर ऊर्णा नामक बिंदी पाई जाती है, किंतु मथुरा की मूर्ति में ऊर्णा नहीं मिलती है। (4) गंधार के बुद्ध मथुरा की भाँति सफाचट नहीं होते, अपितु उनके चेहरों पर कुषाण सम्राटों की मूर्तियों की भाँति मूँछें पाई जाती हैं। (5) गंधार की खड़ी मूर्तियों में बुद्ध के दोनों कंधे ढके दिखाये गये हैं, मथुरा में दायाँ कंधा नंगा होता है। (6) गंधार के वस्त्र झीने और पारदर्शक नहीं होते, उनके भीतर से अंदर के वस्त्र नहीं दिखाई देते। किंतु मथुरा में इन पारदर्शक वस्त्रों में भीतर के अंग और वस्त्र स्पष्ट दिखाई देते हैं।
बुद्ध की बहुत सुंदर खड़ी मूर्तियाँ सहरी बहलोल तथा तख्तेबाही से मिली हैं। सहरी बहलोल की एक बड़ी मूर्ति (8 फीट 8 इंच) इस कला का बढ़िया नमूना है। यह अपने विशाल प्रमाण, सौम्य दर्शन और करुणामयी दृष्टि से दर्शकों पर गहरा प्रभाव डालती है। इसमें ऊपर बताई गई सभी विशेषताएँ उष्णीष, लंबे कान, मूँछें, दोनों कंधों का ढका होना, अभय मुद्रा में दायें हाथ का उठा होना दिखाई देता है। इसके माथे पर उर्णा के स्थान पर छोटे गढ़े में चमकीला नग जड़ा हुआ था। इसके हाथों में उँगलियों को मिलाने वाली त्वचा स्पष्ट दिखाई देती है। प्राचीन काल में यह महापुरूषों का लक्षण माना जाता था। इसके मस्तक के पीछे एक बड़ा और सादा प्रभामंडल बना हुआ है।
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