स्मृति ग्रंथों का रचना-काल - date of creation of smriti texts

स्मृति ग्रंथों का रचना-काल - date of creation of smriti texts


स्मृति ग्रंथों के रचना काल के विषय में विद्वानों में मतभेद हैं। मनुस्मृति सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण कानून ग्रंथ माना गया है। संभवत यह ग्रंथ ईसा पूर्व तीसरी अथवा चौथी सदी में लिखा गया। विद्वानों का मत है कि मोटे रूप से इन स्मृति-ग्रंथों की रचना तीसरी सदी ईस्वी पूर्व से लेकर पाँचवीं सदी तक हुई। 


स्मृति ग्रंथों का सांस्कृतिक महत्व


सभी स्मृति ग्रंथों में व्यक्ति, समाज, वर्ण, जाति, धर्म, राजा के कर्तव्य, राजा प्रजा के संबंध न्याय-विधान आदि पर नियम और उपनियम एवं निषेध आदि का विवेचन है। इनमें सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं और रूढ़ियों का विवरण है।

इनमें साधारण दीवानी और फौजदारी दंड विधान का निरूपण है। इनमें तत्कालीन सामाजिक आचार-विचार, व्यवहार, सामाजिक एवं राजनीतिक संबंधों एवं संपत्ति के सिद्धांतों तथा नियम आदि का दिग्दर्शन है। इन ग्रंथों में नियम, उपनियम, विधि-विधान, निषेधों आदि से तत्कालीन परिस्थितियों में भारतीय सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन के विभिन्न अंगों का सुंदर समन्वय किया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में विश्रंखलता उत्पन्न हो गयी थी और उसे छू कर समाज को नयी परंपराओं और विचारधाराओं के आधार पर संगठित और व्यवस्थित किया गया। इससे वेदोत्तर साहित्य में स्मृति-ग्रंथों का बड़ा महत्व है।