संस्कृति की परिभाषा - Definition of culture
संस्कृति की परिभाषा - Definition of culture
संस्कृत भाषा के इस संस्कृति पद की रचना सम् उपसर्गपूरक कृ धातु से क्तिन्' प्रत्यय करके हुई है। सम् कृ क्तिन् (सुट् का आगम) त संस्कृति। इसका शाब्दिक अर्थ है- उत्तम प्रकार से किये गये कार्य। अर्थात् उत्तम आचरण करने वाले शिष्ट व्यक्तियों द्वारा किये गये कार्य। संस्कृति पद का मूल रूप से यह अर्थ होते हुए भी आधुनिक समय में इसका अर्थ इससे अधिक व्यापक रूप में किया जाता है। किसी भी देश, समाज, जाति और व्यक्ति के संपूर्ण आदर्शों, सामाजिक परंपराओं, ऐतिहासिक निधियों, आध्यात्मिक मंतव्यों और जीवन के निर्वाह के लिए की गई चेष्टाओं का अंतर्भाव संस्कृति पद के अंतर्गत हो जाता है।
हिन्दी शब्द संस्कृति का अंग्रेजी रूपांतर Culture होता है। यह Culture शब्द लेटिन भाषा के Culture शब्द से निकला है।
मानव एक सांस्कृतिक प्राणी है। मानव के पास संस्कृति है पशु के पास नहीं। मानव संस्कृति का विकास कर सकता है, पशु नहीं कर सकता। मानव एवं पशु की शारीरिक रचना में पाया जाने वाला अंतर इस बात के लिये उत्तरदायी है कि क्यों मानव संस्कृति का निर्माण कर सकता है और पशु क्यों नहीं कर सकता। पशु को अपने चारों पैरों का प्रयोग चलने-फिरने के लिए करना पड़ता है जबकि पुरुष यह कार्य केवल दो पैरों से कर लेता है एवं उसके दोनों हाथ स्वतंत्र रहते हैं जिससे वह संस्कृति का निर्माण करता है। मनुष्य के मस्तिष्क की रचना इतनी जटिल है
कि उसमें सोचने-समझने की शक्ति अत्यंत तीव्र होती है। पशु का मस्तिष्क इतना कार्य नहीं करता। इसके अतिरिक्त मनुष्य के पास "भाषा" एक ऐसी उपलब्धि है जो पशु के पास नहीं होती। यही कारण है कि विकास की प्रक्रिया के साथ संस्कृति मानव समाज में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होती है। संस्कृति मानव का सीखा हुआ व्यवहार होता है।
संस्कृति की परिभाषा
(1) टायलर
टायलर पहला मानवशास्त्री था जिसने संस्कृति की ऐसी परिभाषा दी जो बहुत प्रचलित हुई एवं प्रायः जिसका वर्णन किया जाता है।
उनके अनुसार संस्कृति वह जटिल पूर्णता है जिसके अंतर्गत ज्ञान, विश्वास, कला, नीति, कानून, प्रथा एवं समाज के सदस्य के रूप में मानव द्वारा अर्जित अंय योग्यताएँ आती हैं।"
(2) रेडफिल्ड
रेडफिल्ड के अनुसार “संस्कृति कला और उपकरणों में व्यक्त परंपरागत ज्ञान का वह संगठित रूप है जो परंपरा में रक्षित होकर मानव समूह की विशेषता बन जाता है। " (3) मेकाइवर
"संस्कृति हमारे दैनिक व्यवहार में कला, साहित्य, धर्म, मनोरंजन और आनंद में पाये जाने वाले रहन-सहन और विचार के तरीकों से हमारी प्रकृति की अभिव्यक्ति है। " (4) राल्फलिन्टन
राल्फलिन्टन के अनुसार "संस्कृति सीखे हुए व्यवहारों एवं उनके परिणामों की वह व्याख्या है जिसके निर्माणकारी तत्व विशिष्ट समाज के सदस्यों द्वारा प्रयुक्त एवं हस्तांतरित होते हैं।”
(5) बिडने
बिडने के अनुसार संस्कृति कृषि, कला, समाज एवं मानसिक तत्वों की उत्पादक है।
उनके अनुसार संस्कृति में, कृषि में उत्पादित वस्तुएँ, कलात्मक निर्माण। दूसरे शब्दों में उद्योग धंधे या कारखानों में उत्पादित वस्तुएँ, सामाजिक उत्पादन, अर्थात् सामाजिक संगठन एवं मानसिक उत्पादन, अर्थात् भाषा, धर्म आदि सम्मिलित होते हैं।
उपरोक्त विभिन्न परिभाषाओं से यह स्पष्ट है कि संस्कृति का तात्पर्य हमारे जीवन की शैली से है। जैसे क्लुकोहन ने कहा है कि “संस्कृति का संबंध किसी मानव समूह की विशिष्ट जीवन प्रणाली से और उसके रहन-सहन की समस्त शैली से होता है।" लुई ने भी संस्कृति को समस्त सामाजिक परंपरा बताया।
संस्कृति मानव की आवश्यकता की पूर्ति में सहायक होती है। मेलिनोस्की के अनुसार संस्कृति में वे पदार्थ औजार और शारीरिक एवं मानसिक आदतें सम्मिलित रहती हैं जो मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कार्य करती हैं।
उपरोक्त विभिन्न परिभाषाओं से यह स्पष्ट है कि समाज व संस्कृति का घनिष्ठ संबंध है। बिना समाज के संस्कृति का कोई अस्तित्व नहीं होता जैसे कि व्यक्तियों के बिना कोई समाज नहीं हो सकता।
इसी प्रकार कोई भी मानव समाज संस्कृति विहीन नहीं होता। चीटियों एवं मधुमक्खियों या अंय पशुओं का समाज संस्कृति विहीन होता है परंतु मानव का जहाँ तक प्रश्न है संस्कृति समाज का ही एक भाग होती है। संस्कृति समाज पर आश्रित है एवं समाज में ही विकसित होती है।
हॉबेल के अनुसार मनुष्य से मनुष्य के रहस्य को सुलझाने के लिए संस्कृति मानव समाज में एक विश्लेषणात्मक कुँजी का का कार्य करती है। संस्कृति विशिष्ट रूप से केवल मानवीय तत्व है।
विश्व के समस्त प्राणियों में मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जिसमें संस्कृति के निर्माण की एवं उसे बनाये रखने की योग्यता है।
संस्कृति की सबसे छोटी एवं उपयोगी परिभाषा हर्षकोवित" ने दी है। उनके अनुसार "संस्कृति मानव निर्मित वातावरण का एक भाग है।” हर्ष कोवित की इस परिभाषा से दो बातें स्पष्ट होती हैं कि मानव का जीवन दो परिस्थितियों का परिणाम है, एक तो प्राकृतिक आदतें एवं दूसरा सामाजिक वातावरण। इससे स्पष्ट होता है कि संस्कृति जैवकीय तत्व से कुछ अलग है तथा मानव द्वारा निर्मित एक व्यवस्था या प्रणाली है।
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