मथुरा कला पर विदेशी प्रभाव - Foreign influence on Mathura art
मथुरा कला पर विदेशी प्रभाव - Foreign influence on Mathura art
मथुरा के कलाकारों ने यद्यपि पुरानी भारतीय परंपरा का अनुसरण करते हुए बुद्ध की मूर्ति का निर्माण किया, फिर भी उन्होंने गंधार प्रदेश से कई बातों को ग्रहण करने में कोई संकोच नहीं किया। मथुरा में गंधार की कला के प्रभाव के कारण निम्नलिखित यूनानी अभिप्राय ग्रहण किये गये अंगूर की बेल मालाधारी देवों का अलंकरण जिसमें छोटे यक्ष मोटी माला को कंधों पर उठाये हुए हैं। नीमिया के सिंह से कुश्ती करता हुआ हिराक्लीज, मद्यपान के यूनानी देवता बैक्स की मद्यपान गोष्ठियों के दृश्य, स्तंभों के ऊपर यूनान की कोरिथ शैली का शीर्षक जिसमें पत्तियों का अलंकरण बना होता है,
यूनानी ज्यूस या बृहस्पति के गरुड़ द्वारा गैनीमीडी के अपहरण का दृश्य यूनान की एक पौराणिक गाथा के अनुसार ट्राय का रहने वाला तरुण गैनीमीड इतना सुंदर था कि ज्यूस ने अपने गरुड़ द्वारा उसका अपहरण करके उसे स्वर्गलोक में मँगवा लिया और अपना प्याला उठाने वाला सेवक बनाया। मथुरा की कुछ बुद्ध मूर्तियों में गंधार शैली की मूर्तियों की कुछ विशेषतायें पाई जाती हैं, जैसे कुछ मूर्तियों के चेहरे पर मूँछे हैं। भारतीय परंपरा के अनुसार बुद्ध के चेहरे पर कभी मूँछे नहीं दिखाई जाती हैं। कुछ मूर्तियों के पांवों में यूनानी ढंग की चप्पलें और छाती पर यज्ञोपवीत की तरह रक्षा सूत्र या तावीजी मालायें है। किंतु यूनानी दृश्यों को अंकित करने वाली मूर्तियाँ मथुरा में बहुत ही कम संख्या में पाई जाती हैं।
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