भारत मिस्र संबंध - India Egypt Relations

भारत मिस्र संबंध - India Egypt Relations


मिस्र के साथ भारतीय व्यापारिक संबंध अति प्राचीन रहे। मिस्र के सम्राट् टोलेमी फिलाडेल्फस (285-246 ई. पू.) के समय के भारत-मिस्र संबंधों के विवरण उपलब्ध हैं। अशोक के एक शिलालेख के अनुसार टोलेमी के राज्य में वहाँ की प्रजा उसके धर्म का पालन करती थी। टोलेमी फिलाडेल्फस ने अपना एक दूत- मंडल डायोनीसियस की अध्यक्षता में अशोक की राजसभा में भेजा था। उसने अपने संस्मरण लिखे हैं।


टोलेमी ने भारतीय व्यापार को प्रोत्साहन दिया। लाल सागर में उसने बर्निस नाम का बंदरगाह बनवाया, जिससे भारतीय व्यापारियों को स्थल मार्ग से न आना पड़े।

बर्निंस से भारतीय व्यापारी विक्रय वस्तुओं की स्थल-मार्ग से नील नदी तक और फिर वहाँ से नौ परिवहन द्वारा अलेग्जेण्ड्रिया ले जाते थे। कुछ समय बाद बर्निस से 180 मील उत्तर में मायोसहोर्मोस बंदरगाह बनवाया गया, जो अलेग्जेंड्रिया के अधिक समीप था। टोलेमी ने लाल सागर और भूमध्यसागर को भी जोड़ने का प्रयास किया। दोनों सागरों को जोड़ने के लिए उसने 150 फीट लंबी तथा 45 फीट चौड़ी नहर खुदवानी प्रारंभ की, परंतु वह पूरी न हो सकी। प्रथम शताब्दी ईसवी में मिस्र के इस मायोस बंदरगाह में प्रत्येक ऋतु में 120 जहाज भारतवर्ष से आते और वहाँ जाते थे।