भारत जावा संबंध - India Java Relations

भारत जावा संबंध - India Java Relations


प्राचीन काल में जावा को यवद्वीप कहा जाता था। जावा की प्राचीन अनुश्रुतियों के अनुसार भारतवर्ष से अगस्त्य मुनि यहाँ आये थे। उन्होंने इस द्वीप में भारतीय धर्म का प्रसार किया था। दूसरी शताब्दी ई. में बीस हजार भारतीय परिवार इस देश में पहुँचे। पाँचवीं शताब्दी ई. में इस द्वीप में शैव मत का प्रसार हुआ। चीनी यात्री फाह्यान भारतवर्ष से चीन लौटते हुए यवद्वीप में उतरा था। उसने अपने संस्मरणों में यहाँ का वृतांत लिखा है। कुछ संस्कृत-अभिलेखों के अनुसार पाँचवीं शताब्दी ई. में यवद्वीप में पूर्णवर्मन् नामक राजा राज्य करता था। उसकी राजधानी तारूमा थी। यह वर्तमान जकार्ता के समीप थी। पूर्णवर्मन् के पूर्वजों ने चंद्रभागा नाम की एक नहर खुदवाई थी। पूर्णवर्मन् ने गोमती ही नहर खुदवाई |


छठी शताब्दी ई. में जावा में बौद्ध धर्म का प्रचार हुआ। इसका श्रेय गुणवर्मा नामक बौद्ध प्रचारक को दिया जाता है। यह काश्मीर के राजा का पुत्र था। गुणवर्मा के प्रभाव में आकर जावा के राजपरिवार ने •बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया। चीन के निमंत्रण पर गुणवर्मा चीन भी गया। आठवीं शताब्दी ई. में जावा में संजय नामक पराक्रमी राजा हुआ। उसके बाद यहाँ शैलेंद्र राजाओं ने अधिकार कर लिया।


नवीं शताब्दी ई. में जावा में जंबूदीप, कंबुज, चीन, यवन, चंपा, कर्नाटक, गौड़ और स्याम से व्यापारी, ब्राह्मण और श्रमण यहाँ आते थे।

कांजीवरम के बौद्ध भिक्षु बालादित्य ने और एक तमिल ब्राह्मण मुतलीसहृदय ने जावा के इन राजाओं की प्रशस्तियाँ लिखी थीं। चीनी विवरणों से विदित होता है कि यहाँ के सुई शासन (589-618) के समय जावा में दस हिंदू राज्य थे। तांग-काल (618-906) में जावा में यह संख्या 28 थी।


जावा में हिंदू राज्यकाल के हिंदूधर्म और संस्कृति के अवशेष प्रचुर संख्या में प्राप्त होते हैं। मध्य जावा के हिंदू मंदिरों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मूर्तियाँ हैं।

पूर्वी जावा में हिंदू और तांत्रिक बौद्ध धर्म के अवशेष मिले हैं। जावा में प्राचीन युग का सबसे विशाल महत्वपूर्ण अवशेष बोरोबुदुर का बौद्ध मंदिर है। इसके निर्माण में महायान संप्रदाय की छाप है। इसे आठवीं शताब्दी ई. में शैलेंद्र राजा ने बनवाया था। जावा की जनता के आचार-विचार, रीति-रिवाज, शासन विधान, कला, विज्ञान, शिक्षा, भाषा और साहित्य, सभी का निर्माण भारतीय पद्धति पर हुआ था। आज भी, जबकि संपूर्णजावा मुस्लिम हो चुका है, वहाँ के जन-जीवन पर भारतीयता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।