वैदिक साहित्य का परिचय - Introduction to Vedic literature
वैदिक साहित्य का परिचय - Introduction to Vedic literature
भारतीय आर्यों के इतिहास के प्राचीनतम युग को वैदिक युग कहते हैं। वैदिक साहित्य का आशय उस विपुल साहित्य से है, जिसके अंतर्गत चारों वेद ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद की संहिताएँ, गद्य एवं दार्शनिक खंड अर्थात् विभिन्न ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषद भी आते हैं। आर्य जाति का सबसे प्राचीन साहित्य वेद है। वेद का अर्थ है ज्ञाना वेद मुख्यतया पद्य में हैं, यद्यपि उनमें गद्य भाग भी विद्यमान हैं। वैदिक पद्य ऋचा कहते हैं, वैदिक गद्य को यजुश् कहा जाता है
और वेदों में जो गीतात्मक (छंद रूप) पद्य हैं, उसे साम कहते हैं। ऋचाओं एवं सामों के एक समूह का नाम सूक्त होता है, जिसका अर्थ है, उत्कृष्ट उक्ति या सुभाषित। वेद में इस प्रकार के हजारों सूक्त विद्यमान हैं। प्राचीन समय में वेदों को 'त्रयी' भी कहते थे। ऋचा, यजुश् और साम- इन तीन प्रकार के पदों में होने के कारण ही वेद को 'त्रयी' संज्ञा भी थी।
वैदिक मंत्रों का संकलन जिस रूप में आजकल उपलब्ध होता है, उसे 'संहिता' कहते हैं। विविध ऋषि वंशों में जो मंत्र श्रुति द्वारा चले आते थे,
बाद में उनका संकलन व संग्रह किया गया। पहले वेदमंत्रों को लेखबद्ध करने की परिपाटी शायद नहीं थी। गुरु-शिष्य परंपरा व पिता-पुत्र परंपरा द्वारा ये मंत्र ऋषि वंशों में स्थिर रहते थे और उन्हें श्रुति (श्रवण) द्वारा शिष्य गुरु से या पुत्र पिता से जानता था। इसी कारण उन्हें श्रुति भी कहा जाता था। विविध ऋषि वंशों में जो विविध सूक्त श्रुति द्वारा चले आते थे, धीरे-धीरे बाद में उनको संकलित किया जाने लगा। इस कार्य का प्रधान श्रेय मुनि वेद व्यास को है। वे महाभारत युद्ध के समकालीन थे और असाधारण रूप से प्रतिभाशाली विद्वान थे। संकलित वैदिक संहिताएँ ही चार वेद हैं— ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद एवं अथर्ववेद।
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