आवश्यकताओं के अनुमान के स्तर - level of estimation of requirements
आवश्यकताओं के अनुमान के स्तर - level of estimation of requirements
(क) संगठनात्मक अध्ययन:- इसके अंतर्गत संगठन का पूरी तरह अध्ययन कर यह पता लगाया जाता है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता है या नहीं।
(ख) कार्य अध्ययन :- कर्मचारियों के कार्य को देखकर या फिर कार्य के परिणामों के द्वारा यह निर्णय लिया जाता है कि कार्य में परिवर्तन की आवश्यकता है कार्य संतुष्टि के अनुसार है तथा उद्देश्यों को प्राप्त कर रहा है या नहीं।
(ग) व्यक्तिगत अध्ययन:- व्यक्तिगत अध्ययन में कर्मचारियों की व्यक्तिगत संतुष्टि को जांचा जाता है। कर्मचारियों में कार्य करने के लिए क्षमताएं व पूर्ण दक्षताएं है या नहीं।
(क) संगठनात्मक अध्ययन- इस अध्ययन के द्वारा संगठन के प्रभावीकरण का अध्ययन किया
जाता है तथा प्रशिक्षण की आवश्यकता कहां है यह निर्धारित किया जाता है और किन परिस्थितियों में प्रशिक्षण शुरू किया जाना है।
संगठनात्मक अध्ययन के स्त्रोतः-
• मिशन वक्तत्व
मानव संसाधन विकास स्टॉक
• दक्षताओं का स्टॉक
• कार्य जीवन की गुणवता
• कार्यक्षमता सूची
• प्रणाली में आए बदलाव
• संगठन में हुए साक्षात्कार
(ख) कार्य अध्ययन - कार्य अध्ययन के द्वारा प्रभावपूर्ण प्रदर्शन के लिए एक कार्य या कार्यों के
समूह से संबंधित सूचनाएं जैसे जानकारियां दक्षताएं, मनोवृतियां, क्षमताएं आदि का पता चलता है।
कार्य अध्ययन द्वारा सूचनाएं कैसे प्राप्त होती है।
• जानकारी दक्षताओं तथा क्षमताओं की विश्लेषण द्वारा।
• प्रदर्शन प्रमाप।
• कार्य की निगरानी द्वारा या कार्य के सैंपल लेकर।
• कार्य को प्रदर्शित करके।
• कार्य स्टॉक की प्रश्नोतरी द्वारा।
• कार्य से संबंधी प्रतिक्रियाओं को पढकर
• कार्य से संबंधी प्रश्न पूछकर ।
• कार्य करने के तरीकों की जांच के द्वारा।
(ग) व्यक्तिगत अध्ययन- इस में यह अध्ययन किया जाता है कि कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से कार्य में कितना शामिल है। व्यक्तिगत अध्ययन द्वारा यह निर्धारित किया जाता है कि क्या व्यक्ति को प्रशिक्षण की आवश्यकता है तथा किस प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
विषेशताएं
यह अध्ययन कई प्रकार की सूचनाओं के स्त्रोत से लिया जाता है। • सारांश अध्ययन- व्यक्तिगत रूप से कर्मचारियों की सम्पूर्ण सफलताओं की जांच की जाती है।
• नैदानिक अध्ययन- कर्मचारियों के प्रदर्शन के कारणों का पता लगाया जाता है।
व्यक्तिगत अध्ययन के स्त्रोत- सूचनाओं के स्त्रोत निम्नलिखित हो सकते है।
• प्रदर्शन मूल्यांकन द्वारा
• प्रदर्शन में आई समस्याओं द्वारा
• निगरानी द्वारा
कार्य के नमूनों के द्वारा
• साक्षात्कारों के द्वारा
• प्रश्नोतर / प्रश्नावली के द्वारा
. मनोवृतियों के द्वारा
• प्रशिक्षण प्रगति चार्ट के द्वारा
आवश्यकताओं के अनुमान के चार चरण-
चरण 1 - अंतर अध्ययन का प्रदर्शन- पहले चरण के अंतर्गत संगठन के कर्मचारियों की वास्तविक प्रदर्शन का पता लगाना तथा पहले से निर्धारित प्रमापों का या निश्चित किए गए प्रदर्शन के अंतर की जांच करना है।
इस अध्ययन के दो भाग होते है:- (1) वर्तमान स्थिति (2) अपेक्षित स्थिति
वर्तमान प्रदर्शन तथा अपेक्षित प्रदर्शन के अंतर के द्वारा जरूरतों, उद्देश्यों तथा लक्ष्यों का पता चलता है।
चरण 2: - प्राथमिकताओं तथा महत्वता को जानना ।
जिन आवश्यकताओं का ज्ञात हुआ है क्या वह आवश्यकताएं वास्तविक है, इसका पता लगाना, यदि ये आवश्यकताएं वास्तविक है तथा इन आवश्यकताओं की महत्वता को विस्तृत करना संगठन की जरूरतों व आवश्यकताओं में तत्कालिकता करना। उदाहरणार्थ-
• लागत प्रभावीकरण
वैधानिक अनिवार्यताएं
यदि कुछ आवश्यकताएं कम महत्वपूर्ण है, तो उन आवश्यकताओं को छोडकर अपनी क्षमताओं का सही इस्तेमाल अधिक मूल्यांवान तथा अधिक प्रभाव वाली आवश्यकताओं पर कार्य कर, प्रदर्शन की समस्याओं को दूर करें।
चरण 3- प्रदर्शन में आई समस्याओं के कारणों का पता लगाना या अवसरों का पता लगाना ।
बेहतर प्रदर्शन के लिए क्या आवश्यकताएं हो सकती है। यह जानने के बाद आवश्यक समाधानों को लागू करना चाहिए। जरूरतों को जानने के लिए दो प्रश्न पूछे जाने चाहिए?
क्या कर्मचारी अपना कार्य प्रभावपूर्ण तरीकों से कर रहे है ?
• क्या कर्मचारियों को कार्य करने के सही तरीके की जानकारी है ?
यहां पर पूर्ण जाचं की आवश्यकता होगी तथा कर्मचारियों का, उनके कार्यों तथा संगठन का पूर्ण अध्ययन वह भी वर्तमान स्थितियों तथा भविष्य की तैयारी के लिए होगा।
चरण 4- समस्याओं के समाधान का पता लगाना तथा विकास के अवसरों को ढूंढना
यदि संगठन में लोग कार्यो को प्रभावपूर्वक तरीकों से नहीं कर रहे तो इसका कारण पता लगाकर, उचित प्रशिक्षण का आयोजन करवाना। संगठन विकास की प्रक्रियाओं के द्वारा कुछ समस्याओं जैसे- जानकारी का अभाव, किसी प्रकार के परिवर्तन का प्रभाव आदि का समाधान प्रशिक्षण द्वारा किया जा सकता है।
नियोजन संगठन का पूर्णगठन, प्रदर्शन प्रबंधन तथा टीम बिल्डिंग आदि द्वारा भी समस्याओं का समाधान किया जाता है।
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