संस्कृति एवं सभ्यता में संबंध - relationship between culture and civilization

 संस्कृति एवं सभ्यता में संबंध - relationship between culture and civilization


सभ्यता एवं संस्कृति के संबंधों की विवेचना निम्न दृष्टिकोणोंसे की जा सकती है- 


(1) सभ्यता संस्कृति की वाहक है


मेकाइवर एवं पेज के अनुसार सभ्यता संस्कृति की वाहक है। दूसरे शब्दों में सभ्यता, संस्कृति के विकास में सहायक होती है। संस्कृति औद्योगिक विकास की दशाओं में आगे बढ़ती है। सभ्यता के विकास ने संस्कृति का निर्माण करने के लिये मानव को पर्याप्त समय दिया है। औद्योगिक प्रगति ने मानव को दिन भर शारीरिक आवश्यकताओं, आहार एवं संरक्षण की आवश्यकताओं की पूर्ति में ही लगे रहने से बचाया है। यह सभ्यता ही है जिसने हमारी इन आवश्यकताओं की पूर्ति को सुगम बनाया है व संस्कृति के विकास की तरफ ध्यान देने के लिये हमें समय दिया है। सभ्यता के उदय के पूर्व का मानव सांस्कृतिक दृष्टिकोण से पिछड़ा हुआ था। संस्कृति के कई पक्षों का सृजन एवं विकास सभ्यता की सहायता से ही संभव हुआ है। 


(2) सभ्यता सांस्कृतिक क्रियाओं के प्रारंभ में सहायक होती है


सभ्यता के कई उपकरणों का संस्कृति को प्रारंभ करने में यद्यपि प्रत्यक्ष महत्व कम होता है, किंतु अप्रत्यक्ष रूप से वे संस्कृति के विकास में सहायक होते हैं। औद्योगिक विकास के कारण ही आज हम हमारी भौतिक आवश्यकताओं की सुगमता से पूर्ति करके, संस्कृति के निर्माण की तरफ ध्यान देने में समर्थ हुए हैं। औद्योगिक विकास के कारण ही हमने प्रकृति की कई वस्तुओं का शोषण करना सीखा है जिसके फलस्वरूप हमारा जीवित रहने का संघर्ष आसान बना है। स्पष्ट है कि सभ्यता के विकास ने संस्कृति के निर्माण को आसान एवं सुगम बना दिया है।


(3) सभ्यता संस्कृति का पर्यावरण है


हमारे दर्शन, विचार, कला, नैतिकताएँ आदि सभ्यता के द्वारा प्रभावित होते हैं। सभ्यता के उपकरण अवश्य ही हमारी इच्छाओं के उत्पादन हैं परंतु बदले में वे भी हमारी इच्छाओं को प्रेरित एवं संशोधित करते हैं। दूरबीन के कारण विश्व संबंधी हमारेविचारों में परिवर्तन हुआ है, माइक्रोस्कोप ने जीवन की प्रकृति के संबंध में हमारे विचारों को संशोधित किया है। इन्होंने हमारे धर्म व आचरणों को भी प्रभावित किया है। यंत्रयुग ने समाज में नई आदतों को पैदा किया है व हमें नये आनंद से भर दिया है तथा नये दर्शन एवं नैतिकताओं की उत्पत्ति की है। अतः सभ्यता संस्कृति को न केवल नया वातावरण प्रदान करती है वरन नई दिशा भी प्रदान करती है। (4) संस्कृति भी सभ्यता को प्रभावित करती है


उपरोक्तानुसार सभ्यता के संस्कृति पर पड़ने वाले प्रभावों का विवेचन किया गया है। यदि दूसरे पक्ष पर भी विचार किया जाये तो स्पष्टतः विदित होता है कि संस्कृति भी सभ्यता को प्रभावित करती है। प्रत्येक समाज का अपना सांस्कृतिक दृष्टिकोण होता है। मनुष्य प्रत्येक आविष्कार का तकनीक का और विश्व का सांस्कृतिक दृष्टिकोण के स्तर के अनुसार ही मूल्यांकन करता है। हमारे सांस्कृतिक मूल्यों के अनुसार ही हम सभ्यता के उपकरणों को जन्म देते हैं। नाइट क्लब्स् भारतीय संस्कृति के आदर्शों से मेल नहीं खाते यही कारण है कि भारत में उनका प्रसार उतनी तीव्र गति से नहीं हो पाया जितना कि पश्चिमी देशों में निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सभ्यता समाज की संचालक शक्ति है तो संस्कृति उसका परिचालन करने वाला पहिया है।