उत्तर वैदिक काल में धार्मिक जीवन - Religious Life in the Later Vedic Period
उत्तर वैदिक काल में धार्मिक जीवन - Religious Life in the Later Vedic Period
ऋग्वेद के बाद का समय उत्तर वैदिक युग के नाम से प्रख्यात है। इस उत्तर वैदिक युग में अथर्ववेद, सामवेद और यजुर्वेद तथा सूत्रग्रंथों की रचना हुई। ये तीनों वेद और सूत्रग्रंथ ईस्वी पूर्व सन् 1200 वर्ष से लेकर ईस्वी पूर्व सन् 200 की अवधि में लिखे गये। अतएव इस युग को उत्तर वैदिक काल कहते थे। पूर्व वैदिक और उत्तर वैदिक काल में एक अत्यंत दीर्घकाल का अंतर था। इस लंबी अवधि में उत्तर वैदिक काल के जीवन के सभी क्षेत्रों में खूब परिवर्तन हुए। इस समय पूर्व वैदिक काल की संस्कृति में अत्यधिक परिवर्तन हो गया था। आर्यों का प्रसार भी भारत में अधिक हो गया था।
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