आर्यावर्त का प्रथम अभियान - Aryavarta's first campaign
आर्यावर्त का प्रथम अभियान - Aryavarta's first campaign
समुद्रगुप्त ने अपनी दिग्विजय का प्रारंभ उत्तरी भारत के राजाओं पर विजय प्राप्त करके किया। प्रयाग प्रशस्ति की 13वीं व 14वीं पंक्ति में इस अभियान का वर्णन किया गया है। प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार समुद्रगुप्त ने इस अभियान के दौरान निम्नलिखित राजाओं पर विजय प्राप्त की
(1) अच्युत इस नरेश के विषय में अत्यंत अल्प जानकारी उपलब्ध है। डॉ. जायसवाल के अनुसार अच्युत अहिच्छत्र (बरेली) का शासक था, किंतु उसकी मुद्राओं की नागवंशीय मुद्राओं से समानता के कारण कुछ अन्य विद्वान अच्युत को नागवंशीय शासकमानते हैं।
(2) नागसेन - यह नागवंशीय शासक था जिसकी राजधानी पद्मावती थी। पद्मावती आधुनिक ग्वालियर जिले में स्थित थी। डॉ. जायसवाल का विचार है कि नागसेन मथुरा में शासन कर रहा था।
(3) प्रयाग प्रशस्ति में नागसेन से आगे का भाग नष्ट हो गया है, कुछ विद्वानों का विचार हैं कि वहाँ गणपतिनागलिखा हुआ था तथा उसके अनुसार नागसेन के बाद ग' शब्द अभी भी पढ़ा जा सकता है। गणपतिनाग नागवंशीय शासक था जो विदिशा में शासन करता था।
(4) कोटकुल- कोटकुल, वंश का नाम है, प्रयाग प्रशस्ति में इस शब्द से पूर्व राजा का नाम भी लिखा हुआ होगा किंतु अब वह मिट गया है। डॉ. जायसवाल आदि कुछ विद्वानों का विचार है कि कोटकुल वंश पाटलिपुत्र का मगध-वंश था। अपने मत के समर्थन में उन्होंने प्रयाग प्रशस्ति की कोटकुल शब्द से आगे के वर्णन का आश्रय लिया है जिसके अनुसार कोटकुल पर विजय के पश्चात् समुद्रगुप्त ने पुष्पपुर में उत्सव मनाया। इस संदर्भ में डॉ. आर. सी. मजूमदार का मत भी उचित प्रतीत होता है कि समुद्रगुप्त द्वारा पराजित कोटकुल-वंश कान्यकुब्ज (कन्नौज) में शासन कर रहा था।
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