आर्यावर्त का द्वितीय अभियान - Aryavarta's second expedition
आर्यावर्त का द्वितीय अभियान - Aryavarta's second expedition
समद्रगुप्त ने अपने प्रथम आर्यावर्त अभियान के समय अच्युत, नागसेन, गणपतिनाग व कोकुल वंश के किसी राजा को परास्त किया था किंतु उनका उन्मूलन नहीं किया था। अतः ऐसा प्रतीत होता है कि समुद्रगुप्त के दक्षिणापथ अभियान के समय उत्तर-भारत के इन राजाओं ने पुनः स्वतंत्रता घोषित कर दी तथा गुप्तों की बढ़ती हुई शक्ति से आतंकित होकर आर्यावर्त्तके अन्य शासक भी अपनी समुद्रगुप्त का विरोध करने के उद्देश्य से सिर उठाने लगे। अतः आर्यावर्त्त के द्वितीय अभियान में समुद्रगुप्त ने निम्नलिखित 9 राजाओं को परास्त किया-
(1) रुद्रदेव - यह कौशांबी का राजा था।
(2) मतिल- डॉ. जायसवाल के अनुसार यह अंतर्वेदी का नागवंशी शासक था, जिसकी राजधानी इंद्रपुर (बुलन्दशहर के समीप) थी।
(3) नागदत्त - इस राजा के विषय में निश्चित रूप से कुछ भी ज्ञात नहीं है। इस राजा की मथुरा के समीप अनेक मुद्राएँ प्राप्त हुई हैं।
(4) चंद्रवर्मन इस राजा के विषय में अनके मत हैं। भण्डारकर, रायचौधरी व सरकार इसे पूर्वी बंगाल के पोखरण का शासक मानते हैं जबकि हरप्रसाद शास्त्री इसे मारवाड़ का शासक बताते हैं।
(5) गणपतिनाग- यह विदिशा अथवा पद्मावती का शासक था।
(6) नागसेन - यह मथुरा का शासक था।
(7) अच्युत- यह अहिच्छत्र उत्तर प्रदेश का शासक था।
(8) नंदि - डॉ. दुनिया नदि को विदिशा का राजा मानते हैं।
(9) बलवर्मा - कुछ विद्वानों का मत है कि यह कामरूप का शासक था, परंतु कामरूप आर्यावर्त में
स्थित नहीं है, अतः किसी अन्य स्थान पर ही शासन करता होगा।
अटाविक राज्यों पर विजय
प्रयाग प्रशस्ति से ज्ञात होता है कि समुद्रगुप्त ने अटाविक राज्यों के शासकों को अपना दास बना लिया था। इससे ऐसा आभास होता है कि समुद्रगुप्त ने अटाविक राज्यों को अपने साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया था। फ्लीट का विचार है कि ये अटाविक राज्य उत्तर में गाजीपुर से लेकर जबलपुर तक फैले हुए थे। इस निष्कर्ष की पुष्टि एरण अभिलेख से भी होती है, जिसके अनुसार ऐरिकेण- प्रदेश (एरण, सागर- जिला) उसके अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत था, किंतु कुछ अन्य विद्वानों का विचार हैं कि अटाविक राज्य आर्यावर्त्त और पूर्वी सीमांत प्रदेशों के बीच में स्थित थे।
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