मध्य काल में स्त्रियों की स्थिति को लेकर भ्रम - Confusion about the status of women in the medieval period

मध्य काल में स्त्रियों की स्थिति को लेकर भ्रम - Confusion about the status of women in the medieval period

मध्यकाल स्त्रियों के लिहाज से ऐसा समय माना जाता है, जिसमें महिलाओं के ऊपर सबसे ज्यादा अत्याचार होने की बात कही जाती है। प्राचीन काल की तथाकथित महिलाओं के लिए स्वर्णिम युग वाली संस्कृति के नष्ट होने और महिलाओं के ऊपर बाल विवाह, विधवा विवाह निषेध, सती प्रथा का प्रारंभ होने जैसी कुप्रथाओं के बढ़ने के लिए इतिहास में इसी काल को दोष दिया जाता रहा है। इसका कारण बताया जाता है, भारत में मुस्लिमों का आगमन और हिंदू स्त्रियों को जबरन अपनाने या अपमानित करने की धारणा, ताकि हिंदूओको नीचा दिखाया जा सके। अपने आलेख 'आल्टेकेरियन अवधारणा के परे' में इस मानसिकता के संबंध में शकुंतला राव शास्त्री के विचार प्रस्तुत करती हैं।


"दसवीं और ग्यारहवीं सदियाँ हमारे देश में मुसलमानों के आगमन की साक्षी रही हैं। जिन्होंने बाद में यहाँ अपने पैर मजबूती से जमा लिए । जब हिंदूसंस्कृति का एक ऐसी संस्कृति से टकराव हुआ जो एकदम भिन्न थी तो समाज के अगुआओं ने अपने हितों, विशेषकर महिलाओं की स्थिति की सुरक्षा के लिए नियम कानून बनाना शुरू कर दिए। उन (महिलाओं) पर गहरी बंदिशें लगा दी गई। इस काल में हम बाल विवाह की जड़ें पूरी तरह जमाते हुए देखते हैं। शैतानी हाथों में पड़कर अपनी दुर्गति करवाने के बजाय विधवा का मर जाना ही बेहतर था इसलिए विधवा द्वारा आत्मदाह को कानूनी मान्यता दे दी गई, जिसमें आशा जाती थी कि इस प्रकार उस दुर्भाग्यशाली पीड़ित महिला को स्वर्गिक वैभव की प्राप्ति होगी। यह और ऐसे कई प्रावधान लागू कर दिए गए, जिनसे महिलाओं की स्वतंत्रता पर काफी बंदिशें लग गई। ऐसा संभवतः उन्हें विदेशियों से बचाने और नस्ल की शुद्धता बनाए रखने के लिए किया गया था" (चक्रवर्ती, अल्टेकेरियन अवधारणा के परे, 2001 ) 1


इसी आलेख में उमा जी आरा सी। दत्त जो कि एक प्रख्यात राष्ट्रवादी इतिहासकार हैं, के विचारों को भी प्रस्तुत करती हैं। आर.सी. दत्त कहते हैं।


"महिलाओं को पूरी तरह अलग-अलग रखना और उन पर पाबंदियाँ लगाना हिंदू परंपरा नहीं था । मुसलमानों के आने तक यह बातें बिलकुल अजनबी थीं... महिलाओं को ऐसी श्रेष्ठ स्थिति हिंदूओं के अलावा और किसी प्राचीन राष्ट्र में नहीं दी गई थी (चक्रवर्ती, अल्टेकेरियन अवधारणा के परे 2001 ) । इन दोनों के बयान सामने रखकर उमा जी मुस्लिमों के आगमन और उनके बसने को लेकर कितना नकारात्मक भाव है, उसे सामने रखने की कोशिश करती हैं। साथ ही वह यह भी बताती हैं कि महिलाओं से जुड़ी सभी समस्याओं की जड़ में मुस्लिम आगमन को ही वजह माना जाता है, जबकि महिलाओं से जुड़ी तमाम कुप्रथाओं, हिंसाओं एवं दोयम दर्जेके व्यवहार का प्रचलन प्राचीन काल में भी देखे जा सकते है, जिसके बारे में हम ऊपर बात कर चुके हैं। इसका सिर्फ मुगलों के आक्रमण से ही संबंध नहीं है। आगे इस काल में हम महिलाओं की स्थिति के बारे में विस्तार से बात करेंगे।