संगम कालीन संस्कृति - Culture of Sangam Ag
संगम कालीन संस्कृति - Culture of Sangam Age
संगम साहित्य संगमकालीन संस्कृति को जानने का प्रमुख स्रोत है। जिस समय उत्तर भारत में ऐतिहासिक काल चल रहा था, उसी समय सुदूर दक्षिण में महापाषाणकालीन संस्कृति का विकास हो रहा था। सुदूर दक्षिण में जो लोग बसते थे, उन्हें इतिहास में महापाषाण निर्माता कहा गया है, क्योंकि ये लोग वस्तुतः अपनी-अपनी वास्तविक बस्तियों के कारण नहीं जाने जाते थे, बल्कि उन कब्रों के कारण जाने जाते थे, जिन्हें महापाषाण कहा जाता था।
अशोक के अभिलेखों में उल्लिखित चेर,
चोल, पांड्य वंश संभवतः भौतिक संस्कृति के उसी युग में हुए थे। काले और लाल मृदभांड इनकी प्रमुख सांस्कृतिक पहचान थी। प्रत्यक्षतः शवों के साथ वस्तुओं को कब्रों में दफनाने की प्रथा प्रचलित थी। स्त्रियाँ अपने पति की मृत्यु के बाद चावल का पिंडदान करती थीं।
संगम साहित्य से स्पष्ट है कि संगम युग के लोग एक उच्च संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते थे।
किसी भी स्थान की संस्कृति मूलतः वहाँ की सामाजिक आर्थिक एवं धार्मिक स्थिति का प्रतिनिधित्व
करती है।
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