भारत में शक - doubt in india

भारत में शक -  doubt in india


लगभग 200 ईसा पूर्व में उत्तरापथ (उत्तरी पश्चिमी भारत) पर केवल यूनानियों का ही आक्रमण और अधिकार नहीं हुआ था, बल्कि शर्को ने भी भारत पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया। प्राचीन स्रोतों में शकों का उल्लेख यवनों के साथ ही प्राप्त होता है। शक कौन थे?


स्कंद पुराण में शक नाम के राजा का उल्लेख मिलता है, जो कलियुग के 3100 वर्ष संवत् अर्थात् 2 ई. पू. में शासक था।


वराह पुराण के अनुसार आनंदपुर (प्राचीन आनर्त देश की राजधानी, जिसकी पहचान बड़ोदा के निकट आधुनिक वडनगर से की गई है) में शक शासन था। यहाँ उल्लिखित शकाधिप या शकानामधिप सौराष्ट्र- काठियावाड़ का शासक था।


संभवतः वराह पुराण में उल्लिखित सौराष्ट्र का सम्राट यक्ष्मधनु एक विदेशी (शक) शासक था, जिसकी पहचान शक क्षत्रप यशोदामन से की जा सकती है।


इस प्रकार स्पष्ट है कि पुराणों में भी शक राजाओं के उल्लेख मिलते हैं। विष्णु पुराण के अनुसार आंध्र भ्रत्यों (सातवाहनों) के बाद सात आभीर या अहीर और दस गर्दभिल्ल शासक हुए। उसके बाद सोलह शक राजा हुए। इनके बाद आठ यवन (बाल्हीक यवन), चौदह तुरुष्क राजा (कुषाण), 13 मुंड तथा 11 मौन शासक पृथ्वी पर हुए। अन्य पुराणों में इनके नामों और शासन काल के विषय में कुछ भेद ईसा पूर्व की दूसरी शताब्दी में ट्रान्सोक्सियाना (आक्सस या वक्षु नदी का उत्तरी भू-भाग) ही शकों का निवास स्थान था।

ईसा से पूर्व दूसरी शताब्दी के अंत में बैक्ट्रिया पर शक जाति ने अधिकार कर लिया था।


चीनी इतिहास से ज्ञात होता है कि 165 ई.पू. के बाद यू-ची नामक एक मध्य एशिया की जाति ने शकों पर आक्रमण करके उनके प्रदेश पर अधिकार कर लिया। लगभग 126 ई. पू. में यूचियों द्वारा बैक्ट्रिया से निष्कासित शकों ने हिरात और सीस्तान के मार्ग से भारत पर आक्रमण करके सिंध (शकद्वीप) में अपनी सत्ता स्थापित की। वहाँ से सिंध की ऊपरी घाटी और पंजाब में ऊपर बढ़ते हुए उनके सरदार मोग (मावेज-मोअस) ने पुष्कलावती (पश्चिमी गंधार की राजधानी) पर अधिकार कर लिया।

\इस प्रकार पूर्व और पश्चिम में यूनानी राज्यों के बीच ही शकों ने भी अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया।


यूनानियों ने बैक्ट्रिया से हिंदुकुश के आसपास तथा काबुल घाटी में राज्य स्थापित किया था। वहीं से काबुल नदी के किनारे खैबर दर्रे से उन्होंने पंजाब पर अधिकार किया और मध्य देश तक आक्रमण किया था। किंतु शक खैबर दर्रे से न आकर बोलन दर्रे से मेक्रान तट वाले उस मार्ग से सिंध के डेल्टा में प्रविष्ट हुए जिस मार्ग से सिकन्दर की सेना क्रेटेरस के नेतृत्व में सिंध डेल्टा से वापस गई थी। सिंध डेल्टा में शकों की सत्ता के कारण ही उसे शकद्वीप भी कहते हैं।