कुषाणों का इतिहास - History of Kushans
कुषाणों का इतिहास - History of Kushans
कुषाण वंश के प्रारंभिक इतिहास के ज्ञान के लिए हमें मुख्यतः चीनी स्रोतों पर निर्भर करना पड़ता है। चीनी ग्रंथों में पान कू' कृत 'सिएन-हान शू' तथा 'फान-ए' कृत 'हाऊ-हान-शू' उपयोगी है। पहला प्रथम हानवंश का इतिहास तथा दूसरा परवर्ती हानवंश का इतिहास है। पान-कू के ग्रंथ से यू-ची जाति के हूण, शक तथा पार्थियन राजाओं के साथ संघर्ष का विवरण मिलता है तथा ज्ञात होता है कि यू- ची जाति पाँच कबीलों में विभक्त थी। फान-ए के ग्रंथ 'हाऊ-हान-शू' से 25 ईस्वी से लेकर 125 ईस्वी तक यू-ची जाति का इतिहास ज्ञात होता है। इससे पता चलता है
कि यू-ची कबीला कुई-शांग (कुषाण) सबसे शक्तिशाली था, जिसके सरदार कुजुल कैडफाइसिस ने अन्य कबीलों को जीतकर एक शक्तिशाली राज्य का निर्माण किया था। कुषाण वंश के प्रथम दो शासकों के इतिहास का अध्ययन हम उपर्युक्त चीनी ग्रंथों के अतिरिक्त पहव शासक गोन्दोफनिर्स के तख्तेबही अभिलेख तथा इन राजाओं द्वारा खुदवाए गए विविध प्रकार के सिक्कों के आधार पर भी करते हैं। कुषाण शासकों में विमा कैडफाइसिस ने ही सर्वप्रथम भारत में स्वर्ण सिक्के प्रचलित करवाए थे।
चीनी स्रोतों तथा सिक्कों से कैडफाइसिस राजाओं की विजय तथा राज्य विस्तार की सूचना मिलती है।
कनिष्क तथा उनके उत्तराधिकारियों का इतिहास हम मुख्य रूप से तिब्बती बौद्ध स्रोतों, संस्कृत बौद्ध ग्रंथों के चीनी अनुवाद तथा चीनी यात्रियों फाहियान तथा हुआन सांग के विवरण से ज्ञात करते हैं। तिब्बती स्रोतों से पता चलता है कि कनिष्क खोतान के राजा विजयकीर्ति का समकालीन था तथा उसी की सहायता से उसने साकेत पर विजय प्राप्त किया था।
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