मध्यकालीन भारत और स्त्री : इस्लाम और स्त्री - Medieval India and Women: Islam and Women

मध्यकालीन भारत और स्त्री : इस्लाम और स्त्री - Medieval India and Women: Islam and Women


इस्लाम में स्त्री संबंधी मान्यताओं, धारणाओं, व्यवस्थाओं, प्रावधानों, निर्देशों इत्यादि की


जानकारी के मुख्यत: चार स्रोत हैं। ये चार स्रोत निम्नलिखित हैं-


(i) कुरान


(ii) हदीस


(iii) इज्मा, कियास


(iv) फतव, इज्तिहाद


इनमें प्रथम दो मूलभूत स्रोत या आधार हैं। शेष दो विभिन्न मुस्लिम धड़ों, समुदायों, स्थानों, स्कूलों इत्यादि के अंतर्गत सीमित और क्षेत्रीय स्तर पर व्यवस्था की सूचना देते हैं। ये चूँकि भिन्न समुदायों, धड़ों, स्कूलों आदि से संबंधित हैं अत परस्पर भिन्न भी हो सकते हैं।


कुरान के चौथे अध्याय 'सूरा अन निसा' में (जिसका अर्थ होता है स्त्री) स्त्री संबंधी मान्यताएँ धारणाएँ व्यवस्थाएँ प्रावधान इत्यादि बिंदु निबद्ध हैं। आगे विषय एवं संदर्भानुसार इनका विवरण प्रस्तुत किया जाएगा।


कुरान और हदीस की व्यवस्थाएं एक ऐतिहासिक समय विशेष के तहत थीं। आने वाले वर्तमान समय के संदर्भ में प्रत्येक स्थिति के लिए ये उपयुक्त हों, यह आवश्यक नहीं। इस समस्या के हल की प्रक्रिया में विभिन्न इस्लामिक विधिशास्त्र, धार्मिक स्कूल इत्यादि बने, जिनमें इस्लाम के बुद्धिजीवी और शोधकर्ता, विद्वान सक्रिय थे और आज भी हैं। इन सबका कार्य एवं प्रयास यह रहता आया है कि कुरान के मूल प्रावधानों के आलोक में नई समस्याओं पर विचार हो, उन पर बहस हो तथा एक ऐसी उपयुक्त और सटीक धर्मसंगत व्यवस्था ईजाद की जा सके, जिस पर सब सहमत हों।