मोग - Mog
मोग - Mog
तक्षशिला के एक ताम्रलेख से मोग नामक राजा के 78वें वर्ष का उल्लेख प्राप्त होता है। उसमें उसे 'महाराज महान मोग' कहा गया है। उसी का उल्लेख हमें सॉल्ट रेन्ज में स्थित मैर के एक कुँए से प्राप्त लेख में भी होता है जहाँ उसे मोअस' कहा गया है। उसकी तिथियाँ किस संवत् में हैं निश्चित नहीं हैं, इसीलिए उसके काल के विषय में मतभेद है। उसके कार्यों के विषय में भी अधिक ज्ञात नहीं है। उसका राज्यकाल 20 ई.पू. से 22 ई. तक माना गया है। डॉ. आर. सी. मजूमदार के अनुसार इस काल तक मध्य देश में मथुरा तक शक राज्य विस्तृत हो चुका था।
मोग के उत्तराधिकारी
सिक्कों से ज्ञात होता है कि मोग या मावेज के बाद एज़ेज़ प्रथम शासक हुआ। वह एक महान शासक था, जिसने यवन सत्ता को निरवशेष कर दिया। उसके सिक्कों पर उसके साथ उसके पुत्र-युवराज एजीलाइसेस (प्रथम) को भी उत्कीर्ण किया गया है। एजेज़ प्रथम के बाद ही एज़ीलाइसेस प्रथम (28 ई.- 40 ई.) शासक हुआ।
एजीलाइसेस प्रथम के साथ उसके सिक्कों पर एज़ेज़ (द्वितीय) को उपराज (क्षत्रप) के रूप में संबद्ध पाते हैं।
यह एज़ेज़ द्वितीय एजीलाइसेस प्रथम का उत्तराधिकारी और आगे चलकर शासक हुआ, जिसका कार्यकाल 35 ई.-79 ई. तक था। एज़ेज़ द्वितीय का उत्तराधिकारी एजीलाइसेस द्वितीय था।
एज़ेज़ द्वितीय के राज्य काल में ही गोन्दोफनिर्स नामक पह्नव राजा ने उत्तरी पश्चिमी भारत के अधिकांश भाग जीत लिए थे। गोन्दोफनिर्स पहले एक पार्थियन या पह्नव गवर्नर था, जिसने आगे चलकर अपने आप को सम्राट घोषित कर लिया।
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