प्रमुख नारीवादी इतिहासकार - Prominent Feminist Historian
प्रमुख नारीवादी इतिहासकार - Prominent Feminist Historian
नारीवादी इतिहासकाराओं ने अपने काम की शुरूआत इतिहास की राष्ट्रवादी पुनर्रचना के विरोध द्वारा लिंग पर कार्य शुरू किया। उदाहरण के लिए, चक्रवर्ती और राय ( 1988, 322 ) ने ध्यान दिलाया कि राष्ट्रवादी इतिहासकार जो राष्ट्र के इतिहास की तलाश कर रहे थे, उन्होंने महिलाओं की भूमिका की छानबीन के जो मापदंड निर्धारित किए गए थे वह महिलाओं की स्थिति से संबंधित प्रश्नों के सीमित समूह में रखे गए थे। यह प्रश्न उच्च जातीय परिवारों, विधवाओं की आर्थिक दशा, महिलाओं के संपत्ति के अधिकारों, शिक्षा का अधिकार इत्यादि आयामों से प्रभावित थे। संक्षेप में महिलाओं के संदर्भ को परिवार के भीतर ही देखा जा रहा था।
नारीवादी इतिहासकार, इसके बदले परिवार से बाहर ऐसी महिलाओं पर प्रकाश डाला जो घनी जमींदारों के घरों में श्रम करती थी। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी अनगिनत महिलाएं थी जिनके पास संपत्ति नहीं थी और जिनका परिवार के भीतर जो स्थिति थी, उसकी व्यापक समाज में कोई प्रासंगिकता नहीं थी उन्हें मात्र तुच्छ श्रम के स्रोत के रूप में देखा गया (चक्रवर्ती और राय, 332)। इसमें उन्होंने बताया कि महिलाओं को एक संपूर्ण इकाई के अंदर नहीं रखा जा सकता बल्कि उन्होंने महिलाओं के विभिन्न इकाइयों को सामाजिक स्तर पर स्पष्ट किया भारत में प्रमुख नारीवादी इतिहासकारों के रूप में निम्नलिखित विदुषियों को जाना जाता है:
डॉ. उमा चक्रवर्ती
उमा चक्रवर्ती एक प्रसिद्ध भारतीय इतिहासकार और नारीवादी हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज में अद्यापन कार्य करती थीं। उन्होंने 19वीं शताब्दी और समसामयिक मुद्दे, बुद्ध एवं प्रारम्भिक भारतीय इतिहास जैसे विषयों पर मुख्य रूप से काम किया है। वे आंदोलनों में भी सक्रिय रहीं हैं। मुख्य रूप से महिला आंदोलनों एवं महिलाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों से संबंधित आंदोलनों मे उनकी महती भूमिका रही है। उन्होने कई जांच समितियों में भी सक्रिय सदस्य की भूमिका निभाई है।
मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय गुजरात न्याय अधिकरण में वे महिला इतिहास लेखन की प्रमुख विद्वान हैं। उन्हे भारतीय महिला आंदोलनों की माता कहा गया है। प्रो. कुमकुम रॉय
प्रोफेसर कुमकुम रॉय जानी मानी विदुषी हैं। उन्होने पहली मध्य सहस्राब्दी में उत्तर भारत में राजशाही का उद्भव विषय पर शोध कार्य किया है। उनका यह शोध कार्य पत्रों एवं उत्तर वैदिक शाब्दिक स्रोतों पर आधारित है जिसका विश्लेषण तात्कालिक राजनैतिक संस्थाओं का उदय एवं पारिवारिक संबंधों के जटिल संबंध को समझने के लिए किया गया है। विद्यालयों में इतिहास पढ़ाना इनकी रुचि है। इन्होंने कई पाठ्यक्रमों का निर्माण किया है। एन सी ई आर टी के पाठ्यक्रम निर्माण में भी सदस्य के रूप में इन्होंने कार्य किया है। स्त्री अध्ययन के प्रति इनकी विशेष रुचि है।
प्रो समिता सेन
प्रो समिता सेन भारत की प्रख्यात महिलावादी बुद्धिजीवी हैं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग में अध्यापन का कार्य करती हैं। उन्होंने इतिहास में स्नातक तथा परास्नातक की शिक्षा कोलकाता विश्वविद्यालय से प्राप्त करने के उपरांत एम लिट की पढ़ाई ऑक्सफोर्ड से की तथा कैंब्रिज से इतिहास में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने कई सारे पुस्तकों की रचना भी की तथा कई आलेख भी लिखे। उन्होने कामगार महिलाओं के स्थिति को सुधारने के लिए सक्रिय रूप से कार्य किया है।
प्रो. इंदु अग्निहोत्री
प्रो. इंदु अग्निहोत्री प्रसिद्ध इतिहासकार एवं महिलावादी हैं। इन्होंने अपनी शिक्षा जे एन यू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग से पूरी की है। जेंडर एवं इतिहास तथा भारत में महिला आंदोलन इनके प्रमुख रुचि का क्षेत्र है। कई सारे पत्र पत्रिकाओं में इनका लेख प्रकाशित हुआ है। इन्होंने स्त्रियों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य किया है।
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