संगम कालीन तमिल राज्य - पांड्य राज्य - Sangam period Tamil kingdom - Pandya kingdom

संगम कालीन तमिल राज्य - पांड्य राज्य - Sangam period Tamil kingdom - Pandya kingdom


संगमयुगीन राज्यों में तीसरा प्रमुख राज्य पांड्यों का था। इस राज्य का सर्वप्रथम उल्लेख मेगास्थनीज ने किया है। अशोक के शिलालेख में भी पांड्य राज्य का उल्लेख मिलता है। कलिंग राज खारवेल के हाथीगुंफा अभिलेख में भी पांड्यों के विरुद्ध खारवेल के अभियान का उल्लेख मिलता है। अतः चोल एवं चेरों की तुलना में हमें प्राचीनकालीन साहित्यिक एवं पुरातात्विक स्रोतों में पांड्यों का उल्लेख कहीं अधिक मिलता है। इसके बावजूद भी हमें पांड्यों के इतिहास को जानने के लिए मुख्यतः संगम साहित्य पर ही निर्भर रहना पड़ता है।


पांड्य राज्य भारतीय प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तथा दक्षिण-पूरब भाग में फैला था।

इसमें आधुनिक मदरा तथा तिन्नवेल्ली के जिले और त्रावणकोर का कुछ भाग शामिल था। इनकी राजधानी मदुरा थी। इनका प्रतीक चिह्न मछली था।


चेर एवं चोलों की ही तरह संगम साहित्य में पांड्यों के विषय में जो विवरणदिया गया है, वह काफी भ्रामक है। अतः इनका वैज्ञानिक प्रविधि से तथ्यपरक विश्लेषण करके ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है। पांड्य वंश का प्रथम महत्वपूर्ण एवं शक्तिशाली राजा नेडुजेलियन (Nedunjeliyan)' (290 ई.) हुआ। पूर्ववर्ती तीन राजाओं के नाम भी हमें संगम साहित्य से प्राप्त होते हैं। जो नेडियोन, पलशालइ (पलशालै उपाधि), मुकुडुमी तथा नेडुजेलियन थे, परंतु इनके शासन काल एवं उपलब्धियों के बारे में कुछ भी पता नहीं चलता।


नेडियोन ने समुद्र पूजा आरंभ की। नेडुजेलियन ने रोमन सम्राट आगस्टस के दरबार में अपना दूत भेजा था। मेगास्थनीज ने बताया कि पांड्य राज्य पर 'हेरावल' की पुत्री का शासन था एवं यह राज्य मंत्रियों के लिए प्रसिद्ध था।


नेडुजेलियन के शासनकाल में प्रारंभ में ही चेर और चोल तथा पाँच अन्य राजाओं ने मिलकर उसके राज्य को जीता तथा राजधानी मदुरा पर घेरा डाल दिया। इन विपरीत परिस्थितियों में साहस का परिचय देते हुए नेडुजेलियन ने अपने शत्रुओं को राजधानी से खदेड़ दिया और उनका पीछा किया तथा पीछा करते हुए चोल राज्य की सीमा में घुस गए,

जहाँ 'तलैयालंगानम्' (तंजौर जिला) के युद्ध में चेर, चोल एवं अन्य पाँच राजाओं को परास्त किया। इस युद्ध को जीतने से इसकी ख्याति में आशातीत वृद्धि हुई। चेर शासक गजमुखशीय को उसने बंदी बनाकर अपने कारागार में डाल दिया। नेडुजेलियन नेमिललै तथा मुत्तरु नामक दो प्रदेशों पर भी अधिकार कर लिया। इस प्रकार हम देखते हैं कि अत्यंत अल्पकाल में डुजेलियन ने न केवल अपने पैतृक राज्य को सुरक्षित किया वरन् उसका विस्तार भी किया।


मदुरा तथा पांड्य देश के संबंध में मदुरै काँजी' नामक रचना में नेडुजेलियन के कुशल शासन का हमें विस्तृत विवरण प्राप्त होता है।

नेडुजेलियन ने किसान एवं व्यापारियों के हित में अनेक कार्य किए। वह स्वयं एक कवि था तथा विद्वानों को उसने आश्रय भी दिया। उसका शासनकाल 210 ई. था। वह वैदिक धर्म का पोषक था तथा उसने अनेक यज्ञों का अनुष्ठान कराया था। उसकी राजधानी तत्कालीन भारत की अत्यंत प्रसिद्ध व्यापारिक एवं सांस्कृतिक नगरी बन गई थी।


चोलों की तरह ही नेडुजेलियन के पश्चात् कुछ वर्षों के लिए पांड्य राज्य का इतिहास अंधकारपूर्ण हो जाता है। इसके पश्चात् सातवीं शताब्दी में पांड्य सत्ता का पुनः उत्कर्ष होता है।