स्मृति ग्रंथों में स्त्रियों की स्थिति - Status of women in smriti texts
स्मृति ग्रंथों में स्त्रियों की स्थिति - Status of women in smriti texts
स्मृति काल स्त्री नियति की दृष्टि से एक घातक काल कहा जा सकता है, क्योंकि इस काल में स्त्रियों पर ऐसी-ऐसी बंदिशें लगाई गई, जो पहले कभी नहीं लगाई गई थीं और जिनके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था। स्मृति-युग में यवनों के भी आक्रमण होना शुरू हुए थे। इस युग में स्त्रियों के अधिकार अत्यधिक संकुचित कर दिए गए थे। स्मृति-काल में लगाए गए प्रतिबंधों की गणना इस प्रकार की जा सकती है-
(1) स्मृतिकारों ने स्त्री को बचपन में पिता के संरक्षण में युवावस्था में पति के संरक्षण में तथा
वृद्धावस्था में पुत्र के संरक्षण में रहने के आदेश दिए।
(2) स्मृति-काल में स्त्री-शिक्षा पर पाबंदी लगा दी गई।
(3) कन्याओं के विवाह की आयु घटकर 10-12 वर्ष रह गई।
(4) अपने लिए स्वयं वर का चुनाव करने का अधिकार छीन लिया गया।
(5) बाल-विवाह का प्रचलन बढ़ गया।
(6) कुलीन विवाह, अनमेल विवाह तथा बाल विवाह का महत्व बढ़ने से बहुपत्नी संप्रदाय होने लगे।
(7) रखैल रखने की प्रथा प्रारंभ हो गई।
(8) वैधव्य की स्थिति में स्त्री और पुरुष के अधिकारों में असमानता आ गई। विधुर चाहे तो 8 या 10 वर्ष की कन्या से विवाह कर सकता था, लेकिन 8 या 10 वर्ष की कन्या का पति मर जाए तो वह आजीवन विधवा बनकर रहने के लिए मजबूर हो जाती थी। इस कारण विधवाओं की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी।
(9) इन नई व्यवस्थाओं के कारण स्त्री की अन्य स्थितियों एवं महत्व तथा सम्मान में भी विघटन प्रारंभ हुआ। । स्त्रियाँ माता के स्थान से गिराकर सेविका बना दी गई और गृहलक्ष्मी से गिराकर याचिका बना दी गई।
वह भार्या हो गई।
(10) स्त्रियों के लिए विवाह ही एकमात्र धार्मिक संस्कार रह गया। विवाह के एकमात्र धार्मिक संस्कार हो जाने का परिणाम यह हुआ कि स्त्री केवल एक देह और दैहिक उपभोग्य वस्तु बनने की प्रक्रिया में आती चली गई।
मनुस्मृति में स्त्रियों के विषय में जो प्रावधान किए गए वे इस प्रकार हैं-
(1) स्त्री सदा किसी-न-किसी के अधीन रहती है, क्योंकि वह स्वतंत्रता के योग्य नहीं है। (अध्याय- 9. मंत्र- 3) पुत्री, पत्नी, माता या कन्या, युवा, वृद्धा किसी भी स्वरूप में नारी स्वतंत्र नहीं होनी चाहिए (अध्याय 9, 2 से 6 तक)।
(2) स्त्री को घर के सारे कार्य सुपुर्द कर देने चाहिए, जिससे कि वह घर से बाहर ही नहीं निकल सके। (अध्याय-9, मंत्र- 1 1 ) | (3) स्त्रियाँ स्वभाव से ही पर-पुरुषों पर रीझने वाली, चंचल और अस्थिर अनुराग वाली होती हैं।
(अध्याय-9, मंत्र- 15)।
(4) पति पत्नी को छोड़ सकता है, सूद (गिरवी) पर रख सकता है,
बेच सकता है, लेकिन स्त्री को इस प्रकार के अधिकार नहीं है। किसी भी स्थिति में, विवाह के बाद, पत्नी सदैव पत्नी ही रहती है। (अध्याय-9, मंत्र- 45 ) ।
(5) जो स्त्री अपने नपुंसक, आलसी, नशा करने वाले अथवा रोगग्रस्त तथा परखियों से संबंध रखने वाले पति की भी आज्ञा का पालन नहीं करे, उसे वस्त्राभूषण उतारकर (अर्थात् निर्वस्त्र करके) तीन माह के लिए अलग कर देना चाहिए। (अध्याय-9, मंत्र-77) (6) संपत्ति, मिल्कियत के अधिकार और दावों के लिए शूद्र की स्त्रियाँ भी दास' हैं। स्त्री को
संपत्ति रखने का अधिकार नहीं है। स्त्री की संपत्ति का मालिक उसका पति पुत्र या पिता है।
(अध्याय 9, मंत्र - 4161
(7) असत्य जिस तरह अपवित्र है, उसी भाँति खियाँ भी अपवित्र हैं। यानी, पढ़ने का, पढ़ाने का,
वेद-मंत्र बोलने का या उपनयन का त्रियों को अधिकार नहीं है (अध्याय-2, मंत्र- 66 ) । (8) स्त्रियाँ नर्कगामिनी होने के कारण वे यज्ञ-कार्य या दैनिक अग्निहोत्र भी नहीं कर सकतीं। (अध्याय 11, मंत्र- 36 एवं 37 ) |
(9) यज्ञ-कार्य करने वाली या वेद मंत्र बोलने वाली स्त्रियों से किसी ब्राह्मण को भोजन नहीं लेना
चाहिए। स्त्रियों द्वारा किए हुए सभी यज्ञ कार्य अशुभ होने से देवों को स्वीकार्य नहीं हैं।
(अध्याय-4, मंत्र 205 एवं 206)।
(10) स्त्री केवल शैया, आभूषण और वस्त्रों को ही प्रेम करने वाली है। वह वासनायुक्त, बेईमान,
ईर्ष्यालु और दुराचारी है। (अध्याय-9, मंत्र- 17)।
(11) स्त्रियों को जीवन भर पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए। (अध्याय-5, मंत्र- 115 ) । पति सदाचारहीन हो, अन्य स्त्रियों में आसक्त हो, दुर्गुणों से भरा हुआ हो, नपुंसक हो, जैसा भी हो,
फिर भी स्त्री को पतिव्रता बनकर उसे देव की तरह पूजना चाहिए। (अध्याय-5, मंत्र-154)।
मनुस्मृति में स्त्रियों का जमकर चरित्रहनन किया गया है। वहाँ उसे विलासिनी, कामपिपासु, चंचलचित्त इत्यादि न जाने क्या-क्या कहा गया है। इस प्रकार स्त्री की छवि बिगाड़ने वाला सबसे बड़ा ग्रंथ बनकर मनुस्मृति सामने आता है। हिंदू धर्म में मनुस्मृति को लगभग कोड ऑफ कंडक्ट का दर्जा हासिल है। इसलिए सदियों से इसका प्रभाव हिंदू-समाज पर निरंतर पड़ता आ रहा है।
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