महिलाएँ और विभाजन - Women and Partition
महिलाएँ और विभाजन - Women and Partition
आजादी का आंदोलन इतिहास का प्रमुख हिस्सा बना लेकिन आजादी मिलने के बाद हुए भारत पाकिस्तान विभाजन का महिलाओं के ऊपर क्या प्रभाव पड़ा ? यह सवाल आधुनिक इतिहास का हिस्सा नहीं बना। इस विभाजन की त्रासदी पर कहानियाँ, उपन्यास, कविताएँ बहुत लिखी गई । इतिहास में भी इसे बहुत दर्दनाक और दुखद घटना के रूप में वर्णित तो किया गया, लेकिन महिलाओं और बच्चों पर इस घटना के पड़ने वाले प्रभाव नदारद रहे। ये बातें अदृश्य थीं। उर्वशी बुटालिया ने मौखिक इतिहास के माध्यम से इस सच से पर्दा हटाने की कोशिश की। विभाजन की शिकार तमाम महिलाओं एवं पुरुषों से लिए लंबे साक्षात्कारों के माध्यम से उन्होंने महिलाओं के शरीर के ऊपर गुज़री विभाजन की विभीषिका को “The Other Side of Silence" (खामोशी के उस पार) पुस्तक के माध्यम से सामने लाया।
इस शोध में महिलाओं और लड़कियों के ऊपर विभाजन के बाद उनके परिवार वालों द्वारा, खुद के समुदाय द्वारा और दूसरे धर्म के समुदाय द्वारा कीगई बर्बर हिंसा का लेखा जोखा दिया गया है। महिलाओं के साथ बलात्कार, उनका क़त्ल, उनका अपहरण, जबर्दस्ती शादी, बच्चे और बाद में राजनैतिक प्रयासों के माध्यम से उनकी बसी बसायी जिंदगी में से उन्हें निकालकर उनके बच्चों के बगैर उन्हें वापस उनके मुल्क ले जाना और नई जिंदगी बसाने की बात करना बहुत ही यातानाकारी रहा (बुटालिया, 2002)। बलात्कार से गर्भवती महिलाओं के गर्भ गिराने या उनकी सुरक्षित जचकी कराने और बाद में उन बच्चों को अनाथाश्रम भेज देना ताकि उन महिलाओं का पुनर्विवाह हो सके ऐसी कई बातें थीं, जो इतिहास का हिस्सा नहीं बन पायीं। पर इस शोध के माध्यम से ये बिंदु भी राजनैतिक इतिहास का हिस्सा बने। इस शोध के माध्यम से लोगों के भीतर राजनैतिक फैसलों के महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को देखने का भी नजरिया विकसित हुआ।
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