आजादी के आंदोलन में महिलाएँ - women in the freedom movement

आजादी के आंदोलन में महिलाएँ - women in the freedom movement


आजादी के आंदोलन के इतिहास में बड़े नेताओं, क्रांतिकारियों का समावेश किया गया। लेकिन महिलाओं की इस लड़ाई में किसी भी प्रकार के सहयोग का जिक्र नहीं था। अगर था भी तो कुछ छुटपुट जिक्र ही शामिल थे। लता सिंह, बद्री नारायण, चारु गुप्ता, राधा कुमार, गेरोल्दीन फोर्ब्स, मालविका कार्लेलकर, मधु किश्वर आदि ने अपने शोध के माध्यम से आजादी के आंदोलन में महिलाओं के योगदान को शामिल किया। इसे भी दो दौर में किया गया। 1857 की लड़ाई में महिलाओं का क्या योगदान रहा और बाद में राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की सहभागिता । 1857 की लड़ाई में खासतौर पर तवायफों के योगदानों पर भी शोध किए गए।

कर दाता के रूप में बड़ी संपत्ति रखने वाली तवायफों ने भी आजादी के आंदोलन में न सिर्फ अपनी संपत्ति अर्पण की, वहीं दूसरी ओर महफिलों में शृंगार के गीत छोड़कर देशभक्ति की प्रेरणा वाले गीत गाने का संकल्प लिया। क्रांतिकारियों को अपने कोठों में छुपाने में मदद की। वीणा ओल्डबर्ग, डॉ. लता सिंह ने इसे लेकर बहुत महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किए हैं। 1857 की क्रांति में दलित महिलाओं के योगदान पर भी कई शोध किए गए। चारु गुप्ता का झलकारी देवी पर किया कार्य एवं बदरीनारायण का दलित महिलाओं के 1857 के संघर्ष में योगदान पर किया शोध काफी चर्चित रहे।


राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की सहभागिता को लेकर भी महत्वपूर्ण कार्य किए गए। गांधी जी के विभिन्न आंदोलनों जैसे कि विदेशी कपड़ो की होली जलाना, दांडी यात्रा घेराव, जेल जाने आदि में बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता रही। राष्ट्रीय आंदोलन की तमाम महत्वपूर्ण तस्वीरों में महिलाओं की बड़ी संख्या दिखाई देती है। फोटोग्राफ्स को भी शोध के स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिससे महिलाओं की आजादी के आंदोलन में भूमिका को प्रकाश में लाया गया।

गांधी का अहिंसक आंदोलन हो सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज का हिस्सा रानी झांसी रेजीमेंट हो या वामपंथी दलों के प्रयास हों, महिलाएँ अपनी-अपनी राजनीति के तहत हर दल के साथ शामिल रहीं हैं। सरोजिनी नायडू, अरुणा आसफ अली, दुर्गा भाभी, रानी गिडियालू कैप्टन लक्ष्मी सहगल, प्रीतिलता वाडेडार जैसे अनेकों नाम हैं, जिन्होंने आजादी के आंदोलन में अपनी जान पर खेलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। राधा कुमार, गेरॉल्डन फोर्ब्स का इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य रहा है (कुमार, 2014) (Forbes, 1998) | मालविका कार्लेल्कर ने फोटोग्राफी के माध्यम से आजादी के आंदोलन को इतिहासबद्ध किया है, जो इस काल की महिलाओं की विभिन्न भूमिकाओं को समझने हेतु काफी रोचक प्रयास है (Karlekar, 2005 )