महिलाओं की शिक्षा में सहभागिता - women's participation in education
महिलाओं की शिक्षा में सहभागिता - women's participation in education
महिलाओं की शिक्षा को लेकर इस दौर में काफी गंभीर प्रयास किए गए। जैसा कि हमने देखा की स्त्री शिक्षा समाज सुधार आंदोलन का एक महत्वपूर्ण मुद्दा था। महिलाओं को शिक्षा भद्र पुरुष की भद्र पत्नी बनने के लिए प्रारंभ की गई, ताकि कहीं भारतीय पुरुष अपनी पत्नियों की शिक्षा और आधुनिक रहन-सहन के मामले में ब्रिटिशों से कमतर न मान लिए जाएँ। पुरुषों के आधुनिक होने की महत्वपूर्ण शर्त उनकी पत्नियों की शिक्षा थी। लेकिन सुधारकों को यह भी डर था कि शिक्षा प्राप्त करके भारतीय नारियाँ अपने तथाकथित स्त्रियोचित गुणों जैसे कि पतिव्रता धर्म, रसोई और बच्चों की जिम्मेदारी से विमुख न हो जाएँ, अतः शिक्षा को भी घरेलू बनाया गया और आदर्श भारतीय नारी का बेहतर निर्माण कैसे हो? शिक्षा के माध्यम से यही प्रयास होने लगे। इनसे अलग प्रयास ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले के रहे। उन्होंने महिलाओं को सिर्फ घरेलू नहीं बल्कि विज्ञान, तर्क शास्त्र आदि की शिक्षा की वकालत की और दलित बालिकाओं के साथ अपने स्कूल की नींव डाली। महिलाओं की शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम, शिक्षिकाओं की उपलब्धता, भवन, छात्रावास आदि बहुत सारे मुद्दे थे, जिनका इतिहास 19 वीं सदी से आगे तक निर्मित किया गया। वीरभारत तलवार की रस्साकशी एवं मधु किश्वर की आर्यावृत्त की बेटियाँ इस विषय के इतिहासलेखन के महत्वपूर्ण प्रयास हैं (तलवार, 2017) (किश्वर, 2010)
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