न्यूजीलैंड में भारतीयों का आगमन - Arrival of Indians in New Zealand

न्यूजीलैंड में भारतीयों का आगमन - Arrival of Indians in New Zealand


भारत में ब्रिटिश उपनिवेश के समय कृषि के वाणिज्यीकरण, लगान की बढ़ोतरी और जोतों की बटाई के कारण भूमि की कमी आदि ग्रामीण स्तर पर होने के कारण किसान की आर्थिक स्थिति खराब होती गई और ऐसे ही हालात में अपने जीवन को चलाने एवं आर्थिक स्थिति को सुधारने हेतु वे अपने देश से बाहर प्रवासित होने पर मजबूर हुए। ऐसे ही किसानों में शामिल थे- पंजाब के जाद, मुंबई और गुजरात के कोली (जो बाद में पटेल बन गए जो न्यूजीलैंड की ओर प्रवासित हुए। 1853 ई. में भारत के गोवा से न्यूजीलैंड आने वाले एडवार्ड पीटर थे।


भारत की स्वतंत्रता के बाद वे आंग्लो-इंडियन जिनका नस्लीय भेदभाव के कारण इंग्लैंड में प्रवेश सम्मानजनक नहीं था, वे प्रवासित होकर आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड गए। न्यूजीलैंड में प्रथम आने वाले भारतीयों में पंजाबी और गुजराती थे। गुजराती, गुजरात के नवसारी और वाइडोली गाँव से जबकि पंजाबी जालंधर और होशियारपुर जिले से थे। 1980 ई. के बाद फीजी से भारतीयों का आगमन बहुत अधिक संख्या में हुआ। भारतीयों का न्यूजीलैंड में पहला संपर्क यहाँ के मूल निवासी माओरी से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के जहाज द्वारा लाए जाने के बाद हुआ।

न्यूजीलैंड में भारतीय डायस्पोरा का जन्म दो पंजाबी भाइयों वीर सिंह गिल और फूमन सिंह गिल के कारण संभव हुआ, जो 1890 ई. में आस्ट्रेलिया होते हुए न्यूजीलैंड पहुँचे थे। फूमन अंग्रेज नर्स से विवाह करके न्यूजीलैंड में बस गया। गुजरातियों का आगमन व्यापारिक रूप में 1903 ई. में हुआ। ये गुजराती व्यापारी नरोत्तम बारबर, केशव छिपा, गुलाब और माकन जीवन थे।


1899 ई. में 'इमिग्रेशन रेजिस्ट्रेशन एक्ट, न्यूजीलैंड में भारतीय एवं अन्य एशियाईयों के अप्रवासन को रोकने के लिए पास किया गया। इस एक्ट के द्वारा न्यूजीलैंड में प्रवेश के लिए अंग्रेजी की जाँच परीक्षा पास करना आवश्यक बना दिया गया।


न्यूजीलैंड पहुँचने वाले गुजराती और पंजाबी समुदाय प्रारंभ में दुकानदारी तथा तरह-तरह के व्यापार में संलग्न थे। 20 वीं शताब्दी के प्रारंभ में यूरोप में पढ़े डॉ. बलदेव सिंह शारे, न्यूजीलैंड आए (1920) और यहीं बस गए। आज बहुत सारे सिख / पंजाबी न्यूजीलैंड में डेयरी व्यापार में संलग्न हैं।


1967 ई. और 1987 ई. के दौरान इंडो-फिजीयन को फिजी और न्यूजीलैंड के सरकार के बीच समझौता वार्ता के तहत कृषि, घरेलू, मजदूरी आदि के लिए न्यूजीलैंड में आने की अनुमति मिली।

1972 के बाद करीब 443 भारतीयों ने युगांडा से आकर न्यूजीलैंड में रिफ्यूजी के रूप में शरण प्राप्त की। 1987 ई. के इमिग्रेशन एक्ट के तहत इंडो- फिजीयन को न्यूजीलैंड में प्रवेश मिला।


5 के सेंसर के अनुसार, न्यूजीलैंड में भारतीयों की जनसंख्या में 48% की वृद्धि हुई, जबकि 2016 चीनी जनसंख्या में 16% प्रतिशत की वृद्धि हुई। इंडियन न्यूजीलैंडर (भारतीय मूल के लोग न्यूजीलैंड में) न्यूजीलैंड की कुल जनसंख्या का 4.04% (2015 के अनुसार)


भारतीयों के बीच प्रचलित भाषाएँ:- हिंदी, गुजराती, तेलुगु, पंजाबी, तमिल, मराठी, फिजी हिंदी, मलयालम, अंग्रेजी। इंडोफीजियन लोग फिजी हिंदी का प्रयोग करते हैं। भारतीयों के धर्म :- हिंदू (53 प्रतिशत), सिर्ख ( 12.5 प्रतिशत), इस्लाम (10.8 प्रतिशत), क्रिश्चन, जोरास्ट्रियन, जैन और बौद्धा न्यूजीलैंड में सबसे ज्यादा जनसंख्या फिजी से आने वाले भारतीयों की है। न्यूजीलैंड में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा फिजी हिंदी की है। (जनगणना 2013)


न्यूजीलैंड में भारतीय धार्मिक पंथों से जुड़े संस्थाएँ:


हिंदू :


• सत्य साई सर्विस ऑर्गनाइजेशन


सुब्रमनियम मंदिर


• भारतीय मंदिर


• महात्मा गांधी सेंटर


• श्री स्वामी नारायण मंदिर


• हरे कृष्णा मंदिर


सिख :


• पंजाबी एसोसिएशन


न्यूजीलैंड सिख सोसाइटी ऑकलैंड शाखा


इस्लाम :


इस्लामिक रिसोर्स सेंटर


• इस्लामिक सेंटर साऊथ ऑकलैंड


इस्लामिक सेंटर और जामा मस्जिद


• रानाई मस्जिद


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