सूरीनाम में भारतीयों का आगमन: अनुबंधित श्रमिक रूप में - Arrival of Indians in Suriname: As indentured labor
सूरीनाम में भारतीयों का आगमन: अनुबंधित श्रमिक रूप में - Arrival of Indians in Suriname: As indentured labor
सूरीनाम में भारतीयों का सम्मिलन अनुबंधित श्रमिकों के रूप में हुआ जिनका धीर-धीरे रूपांतरण इंडो-सूरीनामी मध्यवर्ग में हुआ। भारतीयों का रूपांतरण पहले किसान और बागान के मजदूर व्यापारी, बुद्धिजीवी, सभी प्रकार के कार्यों में कार्यकुशलता प्राप्त करते हुए और अंततः सक्रिय राजनीति में भागीदारी प्रस्तुत कर भारतीय डायस्पोरा के लिए दूसरा अध्याय लिखा।
ब्रिटेन और फ्रांस की तरह, नीदरलैंड ने भी 1863 ई. में अपने यहाँ से दास प्रथा की समाप्ति की घोषणा कर दी। बहुत ना-नुकुर के बाद ब्रिटिश कॉलोनी ने भारत से 1870 ई. में भारतीय अनुबंधि श्रमिकों को नियुक्त कर डच उपनिवेश में भेजने पर समझौता किया।
इसके साथ ही डच उपनिवेशवादियों ने ब्रिटिश गिनिया में अनुबंध की अवधि समाप्त होने वाले मजबूरों को आकर्षित करना भी प्रारंभ किया। अंत में 5 जून, 1873 को 'लालारुख' नामक समुद्री जहाज में कलकत्ता डिपो से लगभग तीन महीने की लंबी यात्रा के बाद 452 भारतीय अनुबंधित मजदूर पारामारिबो (सूरीनाम की राजधानी) पहुँचने में कामयाब हुए। इनमें अधिकांश की नियुक्ति उतर प्रदेश के पूर्वी और बिहार के जिलों से की गई थी। इनमें से बहुतों को राम से जुड़े तीर्थ, श्रीराम के तीर्थ स्थल के नाम पर भी भरमाकर लाया गया, जो बाद में सूरीनाम बन गया था। 1873 ई. से 1916 ई. तक 64 जहाजों के द्वारा करीब 34,304 मजबूरों को सूरीनाम लाया गया। नीदरलैंड के एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार नीदरलैंड लाए गए कुल भारतीय अनुबंधित श्रमिकों में से केवल 11,512 ने ही अपने अनुबंध की समयावधि पूर्ण होने पर जाने की इच्छा जाहिर की।
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