पुनर्जागरण के कारण - cause of renaissance

पुनर्जागरण के कारण - cause of renaissance


पुनर्जागरण की प्रक्रिया प्राचीन साहित्य के अध्ययन एवं मनन के फलस्वरूप प्रकट हुई। यूनान और रोम के विद्वानों ने प्राचीन साहित्य का अध्ययन कर उसकी महत्ता से लोगों को अवगत कराया। नगरों के निवासियों ने अनुकूल साहित्य के अभाव में अपने भौतिक जीवन के समर्थन हेतु प्राचीन साहित्य का सहारा लिया। लोग प्राचीन साहित्य की ओर आकृष्ट हुए, जिससे वे जीवन के नवीन दृष्टिकोण को समझ सकें। इसके कारण उन्हें नवीन, व्यापक और स्वतंत्र दृष्टिकोण प्राप्त हुआ। फलतः अब व्यक्ति की महत्ता बढ़ने लगी। सांस्कृतिक पुनरूत्थान का आरंभ सर्वप्रथम इटली में हुआ क्योंकि इटली में ही प्राचीन सभ्यता के अवशेष थे।

इस सुविधा के कारण वहाँ के निवासियों ने प्राचीन यूनानी और रोमन साहित्य एवं संस्कृति का अध्ययन आरंभ किया। कालान्तर में समस्त यूरोपीय देशों पर इसका प्रभाव पड़ा। पुनर्जागरण के कारण निम्नलिखित हैं- 


कुस्तुन्तुनिया का पतन


यूरोप के पुनर्जागरण के इतिहास में कुस्तुन्तुनिया के मार्ग का अपना एक विशेष महत्व था। व्यापारिक दृष्टि से इस मार्ग की उपयोगिता अत्यन्त महत्वपूर्ण थी। यह मार्ग एशिया और यूरोप महाद्वीपों को जोड़ने की एक महत्वपूर्ण कड़ी था। मध्य युग में कुस्तुन्तुनिया यूरोपीय व्यापार, संस्कृति एवं विद्या का केन्द्र था।

अतः यूरोप के आधुनिक विकास का कार्य कुस्तुन्तुनिया के भाग्य के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ था।


सन् 1453 ई. में कुस्तुन्तुनिया के मार्ग पर तुर्कों ने अपना अधिकार स्थापित किया, जिसके कारण पश्चिमी देशों का पूर्वी देशों से व्यापार समाप्त हो गया। लोगों के समक्ष अब कोई अन्य मार्ग ढूँढने की समस्या उत्पन्न हुई। आक्रमणकारी तुर्कों के विरूद्ध पोप की अध्यक्षता में धर्म-युद्ध के फलस्वरूप यूरोप के निवासियों की जीवन शैली और भौगोलिक ज्ञान में भारी वृद्धि हुई। इस घटना ने पुनर्जागरण के कार्य और भौगोलिक अनुसंधान की प्रक्रिया को अत्याधिक प्रभावित किया। तुर्कों के आक्रमण से भयभीत होकर यूनानी विद्वान बड़ी संख्या में इटली चले गये,

जहाँ वे प्राचीन विद्या और साहित्य के अध्ययन के कार्य में जुट गये। इस प्रकार इन विद्वानों के सहयोग से पुनर्जागरण का कार्य बड़ी तीव्रता से प्रारंभ हुआ। 


मानववाद


पुनर्जागरण ने यूरोपीय विद्वानों में प्राचीन साहित्य और विद्या के प्रति अभिरूचि उत्पन्न की और लोग उसे बड़ी रूचि के साथ पढ़ने लगे तथा आदर्श रूप में उसे ग्रहण करने लगे। लोगों की इस प्रवृत्ति ने यूरोपीय साहित्य और विविध कलाओं की शैली को प्रभावित किया। इसके कारण यूरोप के विद्वानों में मानववाद का जन्म हुआ। मानववाद का तात्पर्य उस उन्नत ज्ञान से है, जिसमें मानवता, माधुर्य और जीवन की वास्तविकता निहित है,

जिसके सामने आध्यात्मिकता एवं धर्मशास्त्र की महत्ता गौण है। इस तरह जिन विद्वानों ने प्राचीन साहित्य का अध्ययन कर मानववादी सिद्धान्तों पर जोर दिया, उन्हें मानववादी कहा जाने लगा। इन्हें समाज के प्रमुख, धन-सम्पन्न और विद्या-प्रेमी लोगों का सहयोग, संरक्षण तथा प्रोत्साहन प्राप्त हुआ। मानववादी आन्दोलन ने लोगों में बौद्धिक उत्सुकता, तार्किकता और ज्ञान-पिपासा की भावनाओं को जन्म दिया। इस आन्दोलन ने यूरोप के समस्त बौद्धिक वातावरण को व्यापक रूप से प्रभावित किया। 


आविष्कार एवं खोजें


पुनर्जागरण के विकास में तत्कालीन अविष्कारों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। यहाँ उल्लेख करना आवश्यक होगा कि मंगोलों के सम्पर्क से यूरोप को कागज,

कुतुबनुमा तथा बारूद की जानकारी मिली। इस काल में हुए आविष्कार एवं खोजें निम्नलिखित थीं- 


छापाखाना


1453 ई. से पूर्व आविष्कारों के अभाव में पुनर्जागरण इतना सफल नहीं हो सका था जितना कि तत्पश्चात् हुआ। इन आविष्कारों में अत्यन्त महत्वपूर्ण आविष्कार छापाखाने का था। 1460 ई. में जर्मन व्यक्ति जोहन्नेस गुटनबर्ग ने सर्वप्रथम एक ऐसी टाइप मशीन का आविष्कार जर्मनी में किया जो आधुनिक प्रेस की पूर्ववर्ती कही जा सकती है। 1477 ई. में केक्सटन ने इंग्लैण्ड में छापेखाने के प्रयोग को प्रचलित किया। मुद्रण यंत्र के आविष्कार ने बौद्धिक विकास का मार्ग खोल दिया। छापेखाने से विद्या सागर में अत्यन्त सहायता मिली,

क्योंकि इससे पुस्तकों का अभाव दूर हो गया। इससे पूर्व पुस्तकों को हाथ से ही लिखना पड़ता था। अतः पुस्तकों की संख्या कम ही रहती थी तथा उनका मूल्य बहुत अधिक होता था। अतः पुनर्जागरण के उत्थान में छापेखाने की प्रमुख भूमिका रही।


कागज


आधुनिक युग से पूर्व जानवरों की खालों तथा पेड़ की छालों का प्रयोग लिखने के लिए करना पड़ता था, किन्तु अब, एक प्रकार की विशिष्ट घास की खोज की गयी जिससे कागज बनाया जाने लगा जो कि खाल की तुलना में अत्यन्त सस्ता था। मध्य युग में अरबों के माध्यम से यूरोप वासियों ने कागज बनाने की कला सीखी। अतः छापेखाने एवं कागज के आविष्कार ने पुनर्जागरण के प्रचार एवं प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


बारूद


बारूद का प्रचलन यूरोप में पहले से ही था, किन्तु इस समय बारूद का प्रयोग तोप तथा बन्दूक 5 के द्वारा होने लगा, जिससे इंग्लैण्ड के राजाओं ने शक्तिशाली सेना तैयार कर सामन्तों की शक्ति का दमन किया तथा देश में राजनीतिक चेतना का प्रसार किया तथा पुनर्जागरण को बल प्राप्त हुआ।


कुतुबनुमा


कुतुबनुमा का आविष्कार चीन में हुआ था। इटली का प्रसिद्ध यात्री मार्कोपोलो जो 24 वर्षों तक मंगोलिया में राज्यपाल के रूप में रहा था उसने कुतुबनुमा की सहायता से दूर -दूर देशों की यात्रायें एवं व्यापार किया तथा अपनी यात्राओं का विवरण भी लिखा जिसे आज इतिहास का स्रोत माना जाता है।

तत्पश्चात कुतुबनुमा का प्रयोग यूरोप में भी प्रारम्भ हो गया जिसने सामुद्रिक यात्रा को सरल बना दिया, जिसके परिणामस्वरूप व्यापार के अतिरिक्त नवीन विचारों का आदान-प्रदान भी सम्भव हो सका। 


भौगोलिक खोजें


कुतुबनुमा के आविष्कार तथा उसकी यात्राओं के विषय में जानकर अनेक व्यक्तियों में यात्रा करने का उत्साह संचारित हुआ। कोलम्बस, वास्कोडिगामा आदि ने दूर-दूर तक यात्रायें कर अनुभव प्राप्त किया तथा नवीन ज्ञान एवं विचारों के प्रसारण में सहायता दी। अतः भौगोलिक खोजें भी पुनर्जागरण हेतु उत्तरदायी रहीं।


अरबी अंक


यूरोप में पहले रोमन अंकों (I, II, III, IV, V) का प्रयोग होता था, किन्तु अरबों के सम्पर्क में आने से अब अरबी अंकों ( 1, 2, 3, 4, 5) का प्रयोग होने लगा जिससे गुणा-भाग आदि करना सरल हो गया।


उपर्युक्त समस्त कारणों के अतिरिक्त इंग्लैण्ड में मध्ययुग में कुछ ऐसी घटनाएँ हुई जिनके कारण जनता ने मध्यकालीन विचारों को त्यागकर आधुनिक विचारधारा को स्वीकार किया। ये प्रभावशाली घटनाएँ - अकाल, सौ वर्षीय युद्ध, किसानों का विद्रोह तथा गुलाब के फूलों का युद्ध थीं। इन घटनाओं ने इंग्लैण्ड में जमींदारी प्रथा, सामन्तीय व्यवस्था तथा अन्य मध्ययुगीन कुप्रथाओं को समाप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान किया तथा पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त किया।