भारत विभाजन की स्थिति परिस्थितियाँ और परिणाम - Condition of Partition of India Circumstances and Consequences

भारत विभाजन की स्थिति परिस्थितियाँ और परिणाम - Condition of Partition of India Circumstances and Consequences


भारत का विभाजन माउन्टबेटन योजना के आधर पर तैयार भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत हुआ था। इस अधिनियम में कहा गया है कि भारत व पाकिस्तान स्वायत्त बना दिए जाएँगे और ब्रिटिश सरकार उन्हें सत्ता सौंप देगी। 14 अगस्त को पाकिस्तान अधिराज्य और 15 अगस्त को भारतीय संघ की स्थापना की गई। इसी के साथ बंगाल प्रांत को पूर्वी पाकिस्तान और भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में बाँट दिया गया।


अंग्रेजों ने भारत में प्रारंभ से ही फूट डालो राज करो की नीति अपनाई। उनकी यह नीति धर्म के मामले में सबसे घातक थी।

उन्होंने हिंदू और मुसलमान दोनों को इस सीमा तक परस्पर विरोधी बना दिया कि वे एक साथ रहने के विचार के ही दुश्मन हो गए। मुहम्मद अली जिन्ना ने लाहोर में 1940 ई. में मुस्लिम लीग के सम्मेलन में साफ-साफ कहा कि वे दो अलग राष्ट्र चाहते हैं। हिंदूवादी नेताओं और संगठनों ने भी धार्मिक अलगाव को बढ़ाने में भरपूर योगदान किया। कांग्रेस और विशेषतः महात्मा गांधी इसके विरोधी थे, हालांकि आगे चलकर दोनों को इसे स्वीकार करना पड़ा।


विभाजन के समय पूरे देश में भयंकर दो-फसाद हुए। सीमावर्ती प्रांतों और इलाकों में भारी नरसंहार हुआ। इस विभाजन में लाखों की संख्या में आबादियों का स्थानांतरण हुआ ।

लाखों की संख्या में स्त्री-पुरुष शरणार्थी बने । भारत में तो पाकिस्तान से आए शरणार्थी शीघ्र घुलमिल गए, लेकिन पाकिस्तान गए मुसलमान आज भी वहाँ मुहाजिर कहलाते हैं और उन्हें पराया समझा जाता है।


विभाजन के समय कई लाख लोग मारे गए थे। कुछ तो दंगा-फसादों में तथा कुछ सीमाओं पर स्थानांतरण के समय लाखों औरतें बलात्कार, हत्या, हिंसा की शिकार हुई अनगिनत स्त्रियाँ विक्षिप्त हो गई, बहुत का अपहरण हुआ और गायब कर दी गई, धर्म और संप्रदाय के नाम पर देश के बँटवारे ने इन दोनों देशों के बीच एक ऐसी राजनैतिक खाई पैदा की कि आज भी संबंधोंमें खटास कायम है। दोनों देशों की आम जनता एक-दूसरे को बहुत चाहती है,

दोनों देशों की आम जनता के बीच अनेक प्रकार के पारिवारिक व अन्य संबंध अभी भी जारी हैं, किंतु दोनों देशों की राजनैतिक जमात दोनों देशों के बीच की खाई को पाटने नहीं देना चाहती।


विभाजन की त्रासदी का सबसे अधिक अभिशाप दोनों तरफ की स्त्रियों ने झेला, जिसके अंतर्गत स्त्रियों का अपहरण, बलात्कार, अन्य अनेक प्रकार की यौन हिंसा और अत्याचार इत्यादि बड़े पैमाने पर अवघटित हुए। विभाजन के समय, जब आबादियों का बड़े पैमाने पर परस्पर स्थानांतरण बलवे हुए, तो उनमें औरतों को ख़ास तौर से निशाना बनाया गया था।


विभाजन की त्रासदी के परिणामों का लेखन और अंकन इतिहास की किताबों में तो मिलता ही है, हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी के भारतीय एवं पाकिस्तानी साहित्य में भी बराबर मिलता है।

इन भाषाओं में भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों में प्रभूत संख्या में ऐसे साहित्य की रचना हुई है, जो देश-विभाजन की विषयवस्तु को आत्मसात किए हुए हैं। इनमें उपन्यास, कहानी, कविता, रिपोर्ताज आदि विधाओं में मुख्यतः लिखा गया। इन साहित्यिक कृतियों में बहुविध रूप से विभाजन की त्रासदी पर लिखा गया है। विभाजन के कारण, विभिन्न राजनैतिक पार्टियों की उसमें भूमिका, विभिन्न तबकों की दुरभिसंधियाँ, कूटनीतियाँ, अंग्रेजी हुक्मरानों की चालाकियाँ, बड़े राजनैतिक नेताओं की गतिविधियों इत्यादि का विस्तारपूर्वक वर्णन इन साहित्यिक कृतियों में मिलता है। इन साहित्यिक कृतियों में विभाजन के आस- पास का समय जैसे मूर्तित हो गया है। उक्त विषय संदर्भों के अतिरिक्त सांप्रदायिक दो, दंगों की क्रूरता, लोगों का वहशीपन इत्यादि भी बड़े पैमाने पर इन कृतियों में चित्रित हुआ है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के लंबे इतिहास का इन्सानी खून से रंगा पन्ना है, जिसकी याद बार-बार ताज़ा हो जाती है।