द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम - consequences of world war II

द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम - consequences of world war II


6 वर्ष तक चलने वाले द्वितीय विश्वयुद्ध का स्वरूप अत्यंत व्यापक, क्रूर, रक्तरंजित, वीभत्स एवं विनाशकारी था। इस युद्ध के परिणाम दूगामी सिद्ध हुए। इसके परिणामों ने विश्व इतिहास को गहराई के साथ प्रभावित किया। द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रमुख परिणाम निम्नानुसार थे-


1. जन-धन का व्यापक विनाश यह एक अत्यंत विनाशकारी युद्ध सिद्ध हुआ। इस युद्ध में अत्यंत जन-धन की हानि हुई। दोनों ही युद्धरत पक्षों को भारी नुकसान हुआ। युद्धरत राष्ट्रों की लगभग 2,000 करोड़ की संपत्ति नष्ट हो गई। सर्वाधिक आर्थिक हानि रूस को हुई।

उसकी राष्ट्रीय संपत्ति का एक चौथाई भाग नष्ट हो गया। इसका मूल्य लगभग 1 खरब 28 करोड़ डालर था। यही नहीं रूस के लगभग 70 लाख नागरिक मारे गए। रूस के हजारों नगर एवं गाँव पूर्णतः बर्बाद हो गए। इंग्लैंड के 4 लाख 45 हजार एवं फ्रांस के 3 लाख 80 हजार नागरिक मारे गए। इस प्रकार इस विश्वयुद्ध में मरने वालों की कुल संख्या 2 करोड़ 50 लाख तक जा पहुँची। अरबों रूपये की धन-संपत्ति नष्ट हो गई। कई राष्ट्र तबाह हो गए। उनकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई। संपूर्ण विश्व पर विनाश की कालिमा आच्छादित हो गई।


2. सामाजिक आर्थिक प्रभाव विश्वयुद्ध के फलस्वरूप विश्व में प्रायः अधिकांश वस्तुओं का अभाव हो गया।

राष्ट्रों ने अपने यहाँ माल की आपूर्ति हेतु अमेरिका से समान मँगवाया। इस प्रकार पूँजीवादी व्यवस्था को बल मिला। यूरोप में एक नवीन सामाजिक व्यवस्था का आर्विभाव हुआ। जर्मनी को अपनी जा उच्चता का अभिमान अब त्यागना पड़ा।


3. साम्राज्यवाद का अंत इस युद्ध में यूरोपीयराष्ट्रों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई। अब उनके पास इतनी शक्ति नहीं बची कि वे सुदूर देशों में अपने उपनिवेशों के साम्राज्यों को सुरक्षित रख पाते। उधर उनके उपनिवेशों में भी स्वतंत्रता आंदोलन प्रारंभ हुए। यूरोपीय राष्ट्र इन स्वतंत्रता आंदोलनों का दमन करने में असमर्थ थे। इस तरह युद्ध के पश्चात् उपनिवेशों को स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

साम्राज्यवाद का अंत हुआ। इंग्लैं को अपने उपनिवेशों भारत, वर्मा, मलाया एवं मिस्र आदि को स्वतंत्रता प्रदान करना पड़ी।


4. परमाणु युग का सूत्रपात अमेरिका ने जापान के नगरों- हिरोशिमा एवं नागासाकी पर 6 एवं 9 अगस्त 1945 में अणु बम गिराकर विश्व में परमाणु युग का सूत्रपात किया। 22 सितंबर, 1949 को रूस ने भी अणु विस्फोट कर अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती दी। इस प्रकार विश्व में परमाणु युग का सूत्रपात हुआ।


5. रूस का शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उदय इस विश्वयुद्ध में यदि सर्वाधिक हानी रूस को उठानी पड़ी तो युद्ध पश्चात् सर्वाधिक लाभ भी रूस को ही मिला।

रूस को आधा पोलैंड, एण्टोनिया, लिथुआनिया एवं फिनलैंड का भाग प्राप्त हुआ। बाल्कन क्षेत्र में रूस का प्रभाव बढ़ा। रूस ने बाल्कन क्षेत्र, रूमानिया, अल्बानिया एवं यूगोस्लाविया में साम्यवादी सरकारें स्थापित की। एक बार पुनः यूरोपीय देश साम्यवादी प्रभाव से भयभीत हुए।


6. अमेरिका द्वारा विश्व को नेतृत्व द्वितीय विश्वयुद्ध में इंग्लैंड के स्थान पर अमेरिका एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आया। अब विश्व में दो ही शक्तिशाली राष्ट्र रह गए। पूर्व में रूस एवं पश्चिम में अमेरिका ।

द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् अमेरिका एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभरा और उसने पश्चिमी राष्ट्रों को नेतृत्व प्रदान किया।


7. चीन में साम्यवादी सरकार की स्थापना चीन में साम्यवादियों ने अमेरिका समर्थक च्याँग काई शेक के विरुद्ध संघर्ष तीव्र किया। अंततः उसे परास्त कर 1949 ई. में चीन में माओत्से तुंग के नेतृत्व में साम्यवादी सरकार स्थापित हुई। चाऊ एन लाई उस सरकार के प्रधानमंत्री बने।


8. शीत युद्ध का आरंभ - अमेरिका एवं रूस के विश्वशक्ति में उभरते ही द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् विश्व दो खेमों में विभाजित हो गया।

इस प्रकार पूँजीवादी अमेरिका एवं साम्यवादी रूस के मध्य एक प्रकार का तनाव रूपी शीत युद्ध आरंभ हो गया।


9. जर्मनी का विभाजन - 1945 में चारों ओर से जर्मनी पर विश्वयुद्ध के दौरान आक्रमण हुआ। पूर्व की ओर रूस ने तीव्रगति से लगभग आधे जर्मनी पर अधिकार कर लिया। पश्चिमी जर्मनी पर इंग्लैंड, फ्रांस एवं अमेरिका ने अधिकार कर लिया। इस प्रकार जर्मनी का विभाजन हो गया। जर्मनी का विभाजन युद्ध पश्चात् एक जटिल समस्या हो गई।


10. संयुक्त राष्ट्र संघ का उदय- जिस प्रकार प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति पर राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी उसी तरह द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई।

संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के बारे में 7 दिसंबर 1944 ई. को अमेरिका, ब्रिटेन, रूस एवं चीन के प्रतिनिधियों ने वाशिंगटन के पास डम्बरटन में एक सम्मेलन में निर्णय लिया। उनके इस निर्णय के अनुसार 14 अक्टूबर 1949 ई. को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई। इस संस्था का उद्देश्य विश्वयुद्ध के वातावरण को समाप्त कर विभिन्न राष्ट्रों के मध्य पारस्परिक मैत्री का भाव बढ़ाना था। संयुक्त राष्ट्र संघ की विभिन्न शाखाओं द्वारा कई मानवोपयोगी कार्य हाथ में लिए गए। राष्ट्र संघ में जो कमजोरियाँ थीं, उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ में दूर किया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना द्वितीय विश्वयुद्ध की एक महान देन है। तबसे लेकर आज तक संयुक्त राष्ट्रसंघ अपने उद्देश्यों की पूर्ति में निरंतर लगा हुआ है।