वाणिज्यवाद के विकास के कारण - due to the growth of mercantilism
वाणिज्यवाद के विकास के कारण - due to the growth of mercantilism
समुद्री यात्राएँ और भौगोलिक खोजें
कोलम्बस, वास्कोडिगामा, अमेरिगो मेगलन, जॉन केबाट जैसे साहसी नाविकों ने जोखिमभरी समुद्री यात्राएँ करके अनेक नवीन देशों की खोज की। वहाँ धीरे-धीरे नई बस्तियाँ बसाई गयीं। यूरोप के पश्चिमी देशों ने विशेषकर स्पेन, पुर्तगाल, हॉलैण्ड, फ्रांस और इंग्लैण्ड ने नये खोजे हुए देशों में अपने- अपने उपनिवेश और व्यापारिक नगर स्थापित किये। इन उपनिवेशों से चमड़ा, लोहा, रुई, ऊन आदि प्रकार का कच्चा माल प्राप्त कर अपने देश में इनसे नवीन वस्तुएँ निर्मित कर उपनिवेशों को निर्यात के रूप में भेजी और बदले में वहाँ से प्रचुर मात्रा में स्वर्ण और चाँदी प्राप्त की जाने लगी। इससे पूँजी का संचय हुआ, आयात-निर्यात बढ़ा और देश समृद्ध हुआ।
पुनर्जागरण का प्रभाव
पुनर्जागरण ने यूरोप में नवीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ मानव जीवन के प्रति अधिक अभिरुचि और आकांक्षाएँ उत्पन्न कीं। मानव जीवन को अधिक रुचिकर और सुख-सुविधा सम्पन्न बनाने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन दिया गया। इससे भौतिकवाद में वृद्धि हुई। भौतिक सुख-सुविधाओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त धन की माँग बढ़ी और यह बढ़ता हुआ धन वाणिज्य व्यापार और उद्योग-धंधों से ही प्राप्त हो सकता था। इससे वाणिज्यवाद को प्रोत्साहन मिला।
मुद्रा प्रचलन और बैंकिंग प्रणाली
विभिन्न व्यवसायों और उद्योग-धंधों के बढ़ जाने से व्यापार प्रणालियों में सुधार और परिवर्तन हुए।
सुनिश्चित वैज्ञानिक अन्वेषणों के आधार पर उद्योग-धंधों में अधिकाधिक उत्पादन और व्यापार में वस्तुओं का अधिकाधिक क्रय-विक्रय होने लगा। इससे मुद्रा प्रचलन बढ़ा और आधुनिक बैंकिंग प्रणाली का प्रारम्भ और विकास हुआ। बैंकों ने जमा धन को अन्य व्यापारियों, व्यवसायियों और उद्योगपतियों को उनकी साख पर उधार दिया और उनके व्यापारिक वस्तुओं के क्रय-विक्रय संबंधी भुगतान प्रक्रिया को सरल किया। धीरे-धीरे अधिकाधिक पूँजी को व्यापारियों को उपलब्ध कराने हेतु जाइन्ट स्टॉक कम्पनियाँ स्थापित की गयीं और उनका विकास किया गया। इससे वाणिज्यवाद को अधिकाधिक प्रोत्साहन मिला। देशी और विदेशी व्यापार से वाणिज्यवाद का एक नवीन युग प्रारम्भ हुआ।
नवोदित राष्ट्रीय राज्यों द्वारा संरक्षण
यूरोप में 15वीं और 16वीं सदी में राष्ट्रीय राज्यों का उदय और विकास हुआ। इन बलशाली राष्ट्रीय राजाओं ने देश में आंतरिक शांति स्थापित की और बाहरी आक्रमणों से देश को सुरक्षा प्रदान की। सुरक्षा और शांति के वातावरण में उद्योग-धंधे बढ़े और देशी-विदेशी व्यापार बढ़ा और राष्ट्रीय राजाओं ने सोने चाँदी के आयात को प्रोत्साहित किया। इसी बीच व्यापारियों से कर के रूप में पर्याप्त धन प्राप्त हो जाने से राष्ट्रीय राजाओं ने युद्ध किये और अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार किया तथा अन्य महाद्वीपों में अपने नये उपनिवेश स्थापित किये। इन परिस्थितियों में वाणिज्यवाद खूब फला-फूला।
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