विजयालय द्वारा स्थापित राजवंश के प्रारंभिक शासक - Early rulers of the dynasty founded by Vijayalaya
विजयालय द्वारा स्थापित राजवंश के प्रारंभिक शासक - Early rulers of the dynasty founded by Vijayalaya
नौवीं सदी के मध्य में विजयालय (850 ई.-875 ई.) के नेतृत्व में चोल शक्ति का पुनरूत्थान हुआ। विजयालय ने अपना शासन पल्लवों के सामंत के रूप में औयुर के आसपास प्रारंभ किया था। उसकी एक महत्वपूर्ण सैन्य उपलब्धि थी- तंजोर अथवा तजावूर पर विजय, जिसपर पांड्यों के सामंत पुतरैपुर का अधिकार था। उसने तंजोर को अपनी राजधानी बनाया और वहाँ निशुंभसूदिनी मंदिर का निर्माण करवाया।
विजयालय का उत्तराधिकारी आदित्य प्रथम (875-907 ई.) था, जिसने पल्लवों पर आक्रमण कर अंतिम पल्लव शासक अपराजित की हत्या कर दी और इस प्रकार पल्लवों के राज्य पर चोलों का अधिकार स्थापित हो गया। आदित्य प्रथम ने कांची को अपनी सहायक राजधानी के रूप में विकसित किया।
आदित्य प्रथम का उत्तराधिकारी परांतक प्रथम था,
जिसने पांड्य राजा राजसिंह पर आक्रमण कर मद पर अधिकार कर लिया और इस विजय के उपलक्ष्य में उसने मकोड (मकै का विजेता) की उपाधि धारण की। अपने शासनकाल के उत्तरार्द्ध में परांतक प्रथम को राष्ट्रकूट राजा कृष्ण तृतीय द्वारा पराजित होना पड़ा, जिसने तंजोर पर अधिकार कर लिया। इसी क्रम में तक्कोलम के युद्ध में परांतक का ज्येष्ठ पुत्र राजादित्य मारा गया। परांतक प्रथम ने श्रीनिवासनल्लूर में कोरंगनाथ का मंदिर बनवाया।
परांतक की मृत्यु के पश्चात् चोलों का इतिहास स्पष्ट नहीं है। इस अवधि में सुंदर चोल का उल्लेख है, जो परांतक प्रथम का पौत्र था और जिसके विषय में कहा जाता है कि उसने राष्ट्रकूटों को पराजित कर तोंडमंडलम को पुनः अपने अधिकार में ले लिया।
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