महमूद गजनवी के आक्रमणों का प्रभाव - Effects of Mahmud Ghaznavi's invasions

महमूद गजनवी के आक्रमणों का प्रभाव - Effects of Mahmud Ghaznavi's invasions


महमूद के आक्रमणों का भारत पर कोई स्थाई प्रभाव नहीं पड़ा। उसने उत्तरी भारत के पश्चिमी प्रदेशों के राजाओं को युद्ध में परास्त किया, अनेक भव्य तथा समृद्धिशाली नगरों व मंदिरों को विध्वंस किया और समस्त प्रदेशों को आतंकित कर दिया। किंतु उसने पंजाब के अतिरिक्त किसी अन्य प्रदेश को अपने साम्राज्य का अंग नहीं बनाया और न उनकी उचित व्यवस्था की। डॉक्टर ईश्वरी प्रसाद का कथन है धन के लोभ तथा लालच ने महमूद को महत्वपूर्ण लाभों की ओर से अंधा बना दिया था जो भारतीय विजय द्वारा विजेता को प्राप्त होते। वह भारत में इस्लाम धर्म का प्रचार नहीं कर सका, क्योंकि उसकी विध्वंसात्मक नीति ने हिंदुओं में इस्लाम के प्रति घृणा की भावना जागृत कर दी,

जो भारत के हिंदुओं में पर्याप्त समय तक विद्यमान रही और इसी कारण दोनों धर्मों में सामंजस्य स्थापित नहीं हो सका।"


पंजाब के उसके राज्य में सम्मिलित होने के अतिरिक्त उसके आक्रमणों का कोई स्थायी परिणाम नहीं हुआ। किंतु कुछ-न-कुछ दूरस्थ परिणाम अवश्य हुए, जिनके कारण भारत के इतिहास में कुछ विभिन्नता उत्पन्न हुई। अन्य स्थानों पर उसके आक्रमण का प्रभाव नष्ट हो गया। लगभग दो शताब्दी तक राजपूत उत्तरी भारत के स्वामी बने रहे। उन्होंने उसे एक आँधी के समान समझा जो आई और चली गई। उसके आक्रमण के अन्य प्रभाव निम्नलिखित हैं:-


(1) राजाओं की शक्ति को आघात उसके आक्रमणों के कारण भारतीय नरेशों की सैनिक शक्ति को गहरा आघात पहुँचा।


(2) भारतीय सैन्य दुर्बलता का ज्ञान भारतीयों की राजनीतिक तथा सैनिक दुर्बलता का ज्ञान-विदेशियों को लग गया, जिन्होंने उसका पूर्ण रूप से लाभ उठाया।


(3) अतुल संपत्ति का विदेश जाना उसके आक्रमण द्वारा भारत की अतुल संपत्ति विदेश चली गई जिसके कारण भारत की आर्थिक स्थिति में विकार उत्पन्न हो गया। उसने हिंदुओं के उन मंदिरों को विशेष रूप से लूटा, पश्चिमी विजय में किया। जिनमें अतुल धन संचित था। महमूद ने इस संपत्ति का प्रयोग अपनी


(4) स्थापत्य कला के नमूने का अंत- महमूद ने बहुत से मंदिरों तथा भव्य भवनों को नष्ट-भ्रष्ट कर डाला, जिसके कारण भारतीय स्थापत्य कला को बड़ी हानि पहुँची और कला के अनुपम नमूने नष्ट हो गए।


(5) पंजाब का भारत से संबंध विच्छेद- पंजाब को महमूद ने अपने साम्राज्य में सम्मिलित किया। इससे पंजाब का भारत से संबंधविच्छेद हो गया और वह अफगानिस्तान के निकट हो गया। 


(6) अग्रदूत का कार्य - महमूद के आक्रमणों ने मुहम्मद गोरी के आक्रमणों के लिए अग्रदूत का कार्य किया।

यह महमूद ही था, जिसने बारहवीं शताब्दी में मुहम्मद गोरी की अधिक स्थायी विजय के लिए द्वार खोल दिया। कुछ विद्वानों की ऐसी धारणा है कि यदि मुहम्मद गोरी को गजनवी का निर्देशित मार्ग न मिला होता तो वह अपना कार्य संपन्न नहीं कर सकता था। महमूद


(7) आक्रमण के लिए नए मार्ग का खुलना- मुस्लिम आक्रमण के लिए महमूद गजनवी ने नया मार्ग खोल दिया और सिद्ध कर दिया कि उसके द्वारा खोला हुआ मार्ग अरबों के मार्ग की अपेक्षा अधिक सुगम है, इसी मार्ग द्वारा भारत की विजय संभव है। भारत पर अन्य सभी आक्रमण इसी मार्ग से हुए और आक्रमणकारियों को भी सफलता प्राप्त हुई।


(8) अधिकांश भारत का ज्ञान महमूद ने भारत पर सत्रह आक्रमण किए जिनके कारण मुसलमानों को उत्तरी भारत का ज्ञान प्राप्त हो गया तथा भारत की दुर्बलताओं की भी जानकारी मिल गई, जिससे उन्होंने विशेष लाभ उठाया।