वियना समझौतों का विभिन्न शक्तियों पर प्रभाव - Effects of the Vienna Conventions on the Various Powers
वियना समझौतों का विभिन्न शक्तियों पर प्रभाव - Effects of the Vienna Conventions on the Various Powers
वियना समझौतों का विभिन्न देशों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा। फ्रांस को दंडस्वरूप मित्रराष्ट्रों को हरजाना देना पड़ा। मित्रराष्ट्रों की एक सेना फ्रांस में तैनात की गई। इसके रख-रखाव का भार फ्रांस को सौंपा गया, लेकिन इससे फ्रांस को कोई विशेष कठिनाई नहीं हुई क्योंकि नेपोलियन ने फ्रांस को अन्य किसी भी यूरोपीय देश की तुलना में आर्थिक रूप से सर्वाधिक संपन्न बना दिया था। फ्रांस को नेपोलियन द्वारा अपने सैन्य अभियानों में विभिन्न देशों से बलात प्राप्त की गई कलाकृतियों को भी लौटाने का निर्देश दिया गया।
यद्यपि फ्रांस को क्रांति के पूर्व की राजनैतिक सीमाओं में सीमित कर दिया गया,
उसे विदेशों में अवस्थित अपने कई उपनिवेशों को रखने की अनुमति प्रदान की गई। इस कारण 1815 में उसके कुल प्रदेशों का क्षेत्रफल 1789 की तुलना में थोड़ा अधिक ही था। उसके कई उपनिवेश उसके पास सुरक्षित रहे, यद्यि उसे उन सभी से वंचित किया जा सकता था। फ्रांस के प्रति मित्रराष्ट्रों ने यह उदारता इसलिए दिखाई, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि कठोर शर्तों की स्थिति में लुई अपना राजसिंहासन सुरक्षित रखने में समर्थ नहीं हो सकेगा। मित्रराष्ट्रों की दृष्टि में एक सशक्त और सुदृढ़ फ्रांस यूरोप में शक्ति संतुलन के लिए भी आवश्यक था।
इंग्लैंड को नेपोलियन के विरुद्ध अपने प्रयासों के लिए पर्याप्त मुआवजा मिला।
यूरोप में उसे हेलिगोलैण्ड और माल्टा प्राप्त हुआ तथा एड्रियाटिक सागर में उसे आयोनियन द्वीप समूह मिला। इंग्लैंड के औपनिवेशिक साम्राज्य में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। उसे फ्रांस से मॉरिशस, स्पेन से त्रिनिदाद और हॉलैण्ड से 'केप ऑफ गुड होप' प्राप्त हुआ। वस्तुतः वियना कांग्रेस में अन्य विजयी देशों की तुलना में इंग्लैंड ने सर्वाधिक प्रदेश प्राप्त किए।
रूस को वियना सम्मेलन से कई भूभाग प्राप्त हुए। उसने स्वीडेन से फिनलैण्ड प्राप्त किया, किंतु उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी, वारसा पर उसका अधिकार।
इसके परिणामस्वरूप पश्चिम दिशा में उसका अभूतपूर्व प्रसार हुआ। अब यह यूरोप के मामलों में पहले से अधिक वजन के साथ हस्तक्षेप कर सकता था।
ऑस्ट्रिया ने बेल्जियम की क्षतिपूर्ति स्वरूप उत्तरी इटली में वेनेशिया एवं लोम्बार्डी प्राप्त किए। उसने वेरिया से टायरॉल प्राप्त किया तथा एड्रियाटिक के पूर्वी तट पर अवस्थित इल्लीरियन प्रदेशों पर अपना अधिकार स्थापित किया। इस प्रकार, ऑस्ट्रिया ने अपने दूरस्थ प्रदेश के बदले में ऐसे प्रदेश पाए जिसके फलस्वरूप मध्य यूरोप में उसकी शक्ति में अप्रत्याशित वृद्धि हुई। उसे जर्मन परिसंघ का अध्यक्ष बनाया गया।
इस संघ में ऐसे कई राज्य थे जो प्रशा से ईर्ष्या रखते थे। इस कारण ऑस्ट्रिया ने जर्मन परिसंघ पर अत्यंत सहजता से अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया।
प्रशा ने सैक्सनी एवं वेस्टफेलिया में कई भूभागों के अतिरिक्त राइन के किनारे भी कुछ भूखंड प्राप्त किए। उसका अपने उन पॉलिश प्रदेशों पर अधिकार बना रहा जो उसने पोलैंड के प्रथम दो विभाजनों में प्राप्त किया था, किंतु तृतीय विभाजन में प्राप्त पॉलिश प्रदेशों पर से उसका अधिकार समाप्त हो गया। वस्तुतः 1815 में प्रशा का प्रादेशिक विस्तार 1789 जितना ही था, किंतु उसके प्रदेशों की भौगोलिक स्थिति एवं उसकी जनसंख्या की प्रकृति में अंतर आ गया। 1789 में उसका उत्तर-पूर्वी जर्मनी पर अधिकार था,
किंतु 1815 में उसने जर्मनी के पश्चिमोत्तर प्रदेशों पर अपना प्रभाव स्थापित किया। इसी प्रकार उसने 1815 में पोलैंड के स्लावों को खो दिया और उनके बदले में राइनलैण्ड एवं सैक्सनी के जर्मनों को प्राप्त किया। राइनलैण्ड पर अधिकार होने से उसे औद्योगिक संसाधन सहज सुलभ हो गए और वह जर्मनी के सर्वाधिक समृद्ध राज्य के रूप में सामने आया।
वियना कांग्रेस में इटली के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। यह पहले ही तय किया जा चुका था कि ऑस्ट्रिया को बेल्जियम की क्षतिपूर्तिस्वरूप इटली में कुछ भू-भाग दिए जाएँगे और इटली के राज्यों में प्राचीन राजवंशों को पुनर्स्थापित किया जाएगा।
वियना कांग्रेस ने ऑस्ट्रिया को इटली में अवस्थित सर्वाधिक संपन्न एवं सैन्य दृष्टि से सर्वाधिक सशक्त प्रांत लोम्बार्डी एवं वेनेशिया प्रदान किए। अपनी इस नई भौगोलिक स्थिति से ऑस्ट्रिया संपूर्ण इतालवी प्रायद्वीप पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर सकता था। ऑस्ट्रिया के लिए ऐसा कर पाना इसलिए भी सहज था, क्योंकि परमा का राज्य नेपोलियन की पत्नी को दिया गया और ऑस्ट्रिया के राजपरिवार से संबंधित राजकुमारों को मोडेना एवं टस्कनी में पुनस्थापित किया गया। वियना कांग्रेस ने इटली के राज्यों को एकीकृत करने का कोई प्रयास नहीं किया। मेटरनिख की प्रारंभ से ही यह नीति रही कि इटली मात्र स्वतंत्र राज्यों का एक समूह बना रहे। वियना कांग्रेस ने जर्मनी में भी राष्ट्रीय राज्य स्थापित करने का कोई प्रयास नहीं किया। इस सम्मेलन के बाद जर्मनी भी इटली की तरह मात्र एक भौगोलिक अभिव्यक्ति बना रहा।
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