स्वतंत्र प्रवासन - free migration

स्वतंत्र प्रवासन - free migration


18-19 वीं सदी में उपनिवेश की स्थापना के बाद ब्रिटिश शासकों के द्वारा दूसरे औपनिवेशिक देशों के साथ युद्ध तथा उस पर कब्जे के लिए भारतीय लोगों को सैनिक के रूप में भर्ती किया गया तथा भारतीय सैनिक देश से बाहर युद्ध के लिए ले जाए गए और लड़ाई के बाद जब उन्हें छोड़ा गया तो सैनिक जहाँ गए उन्होंने वहीं बसने का निर्णय किया। भारतीय सिपाहियों को ब्रिटिश शासक मुख्य रूप से निम्न सैनिक अभियानों के लिए ले गए, जैसे- 1795 ई. में मलक्का में युद्ध के लिए 1800-1901 में अंग्रेजों ने मिस्र पर आक्रमण के समय भारतीय सैनिकों की मदद ली,

मिस्र अभियान में बचे सैनिक 1810 ई. में मॉरीशस पर विजय के लिए जाते हैं। युद्ध के बाद ब्रिटिश शासन से मुक्ति के बाद मॉरीशस में बसने का निर्णय लेते हैं। ईस्ट इंडिया कंपनी के जहाज जब चलते थे समुद्रपार देशों के लिए, तब उस जहाज के लश्कर में कई भारतीय नाविक, नौकर, कर्मचारी सैनिक होते थे। ये सभी अलग-अलग देशों के अभियानों पर रहते थे। बाद में स्वतंत्र होकर वे बाहर ही बस गए। पूर्वी अफ्रीका खाड़ी देशों (मस्कट, यमन), दक्षिण- पूर्व एशिया के लिए व्यापारियों का प्रवासन होता रहा।