गयाना / गुयाना परिचय - Guyana / Guyana Introduction

गयाना / गुयाना परिचय - Guyana / Guyana Introduction


'गयाना' शब्द का अर्थ है- बहुजल स्रोतों की भूमि। यहाँ चार बड़ी नदियाँ हैं- एसिकीबो, डेमरारा, बर्बीस तथा कोरंटी | इसके उत्तर में अटलांटिक महासागर पूर्व में सूरीनाम, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में ब्राजील और पश्चिम में वेनेजुएला है। गयाना की जलवायु समशीतोष्ण है और मुख्य पैदावार गन्ना और धान है। गयाना अमेरिका के दक्षिण में अटलांटिक महासागर की एक शाखा कैरेबीयाई सागर पर स्थित है इसलिए इसकी गिनती करेबीयाई देशों में भी होती है। (पुष्पिता, 2015 175) गयाना या गुयाना दक्षिणी अमरीका में एक देश है।

इस का आधिकारिक नाम 'कॉपरेटिव रिपब्लिक ऑफ गुयाना है। यह दक्षिण अमरीका के उत्तर-मध्य भाग में स्थित है। यहाँ पर सबसे बड़ी जनसंख्या भारतीय लोगों की है। यहाँ भारतीय लोगों को अंग्रेजों के शासन काल में लाया गया। इस देश पर सबसे पहले हॉलैंड ने और फिर 200 साल तक अंग्रेजों ने शासन किया और इसका नाम 'ब्रिटिश गुयाना' रख दिया। गयाना को ब्रिटेन के 200 वर्षों के शासन से 26 मई, 1966 ई. को आजादी मिली और 23 फ़रवरी, 1970 ई. को यह गणराज्य बना। यहाँ की शासकीय भाषा अंग्रेज़ी है।


गुयाना गयाना, कैरेबियन देशों में त्रिनिदाद और टोबैगो तथा सूरीनाम के बाद चौथा देश है। यहाँ आने वाले अनुबंधित गिरमिटिया श्रमिकों में उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु एवं अन्य दक्षिणी राज्यों के लोग शामिल थे। 19वीं सदी तक ये इंडो गयानिज श्रमिक केवल गन्ना के उत्पादन से जुड़े रहे, परंतु 1900 ई. के बाद जब इनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ, तब वे अन्य कार्यों से भी जुड़े और साथ-ही-साथ अपने बच्चों को शिक्षा देने को तत्पर हुए। आज ये इंडो गयानिज अधिकांशतः चिकित्सा और क़ानूनी पढ़ाई में आगे बढ़े हुए हैं और गयाना के प्रशासन तथा राजनीति में महत्वपूर्ण पदों पर पहुँचकर देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


जब 1834 ई. में गुलामी वर्जित की गई, अफ्रो-गुयानी लोगों ने वेतन के लिए कार्य करने से मना कर दिया। इससे कई बागान बंद हो गए। ब्रिटेन ने हजारों मजबू भारत, पुर्तगाल, चीन तथा अपने अन्य उपनिवेशों से खेतों में काम करने के लिए मजदूर के रूप में गुयाना में लाए। अतः आधुनिक गुयाना की तादात ज्यादातर भारतीयों और अफ्रीकी लोगों से ही बनती है। गुयाना का आधुनिक इतिहास यहाँ अनुबंधित श्रमिक के रूप में लाए गए भारतीय मूल के लोगों से आरंभ होता है क्योंकि गयाना को जब अंग्रेजों से 1966 ई. में स्वतंत्रता मिली, तो पहले प्रधानमंत्री छेदी जगन बने थे। बाद में उनकी पत्नी जेनट जगन भी गुयाना की प्रधानमंत्री बनी।


5 मई, 1838 ई. को बंधुआ मजदूरों की पहले खेप गुयाना पहुँची। बंधुआ मजदूरों को गुयाना लाने का कारोबार 1905 तक चलता रहा। इस अवधि में लगभग सवा दो लाख मजदूर भारत से गयाना लाए गए। 5 से 7 साल की मियाद पूरी होने पर 75 हजार लोग वापस भारत लौट गए। बाकि लोग गयाना में ही बस गए और स्वतंत्र किसान के रूप में रहने लगे, जिन्हें 'ईस्ट इंडियन या इंडो गयानिज' के रूप में जाना जाता है।


गुयाना 1966 ई. में स्वतंत्र हुआ। ब्रिटेन 1950 ई. के आस-पास से ही गुयाना में नए संविधान लाकर प्रशासन पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाने की तैयारी कर रहा था।

इसी नए संविधान के तहत 1953 ई. में गुयाना में पहली बार चुनाव हुए। इस चुनाव में इंडोगयानिज मूल के डॉ. छेदी जगन के नेतृत्व में 'पीपुल्स प्रोग्रेसिव पार्टी' (PPP) की बड़ी जीत हुई और जगन को देश का पहला प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला, परंतु चार महीने के बाद ही छेदी जगन की सरकार को ब्रिटिश प्रशासन द्वारा बर्खास्त कर • दिया गया। आरोप यह लगाया गया कि डॉ. जगन, गुयाना को समाजवादी खेमे में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। गुयाना में मुख्यत दो राजनीतिक दल हैं। एक का नेतृत्व छेदी जगन, पीपुल्स प्रोग्रेसिव पार्टी और दूसरे 'पीपुल्स नेशनल पार्टी' (PNP) का नेतृत्व अफ्रो-गयानिज नेता लाइदेन फ़ोबर्स सैंपसन बर्नहाम कर रहे थे,

जिन्होंने जगन की पार्टी PPP को विखंडित कर नई पार्टी बनाई थी। गुयाना के स्वतंत्रता के समय (1964 से 1992) तक अफ्रो-गयानिज नेता बर्नहम ने सरकार बनाई। सैंपसन बर्नहाम ने अपनी पार्टी (PNP) का कई छोटे पार्टियों के साथ एलायंस करके यूनाइटेड फ्रंट पार्टी (UFP) बनाई और लगातार सत्ता में बने रहे।


सैंपसन बर्नहाम की सरकार के दौरान इंडो गयानिज के बुरे दिन थे। सत्ता के बहकावे में इंडो- गयानिज के साथ नस्लीय भेदभाव किया जाता।

उन पर कई तरह की पाबंदी लगाई गई। प्रशासन के उच्च पदों पर पहुँचने वाले इंडो-गयानिज की राह मुश्किल कर दी गई। इंडो गयानिज द्वारा की जाने वाली सांस्कृतिक गतिविधियों को हतोत्साहित किया गया। इंडो गयानिज का जीवन असुरक्षा और भय से ग्रस्त हो गया। इस प्रकार की विपरीत परिस्थिति में गुयाना के इंडो- गयानिज बड़ी संख्या में कनाडा, अमेरिका की तरफ प्रवासित होने लगे। एक अनुमान के मुताबिक उत्तरी अमेरिका और कनाडा में गयाना से प्रवासित इंडो गयानिज की संख्या करीब 400,000 तक पहुँच गई।

गयाना में जो अफ्रीकी मूल के लोग थे, ब्रिटिश सरकार और ईसाई मिशनरी की प्रेरणा से अधिकांशतः ने क्रिश्चन धर्म को अपना लिया परंतु भारत के अधिकांश लोग हिंदू धर्म के प्रति अडिग थे। इसके कारण ब्रिटिश सरकार ने भारत के समान गुयाना में भी 'फूट डालो और राज्य करो की नीति के तहत इंडो- गयानिज और अफ्रो- गयानिज के बीच भेदभाव पैदा किया।


गुयाना में इंडो- गवानिज के साथ इस प्रकार के नस्लवादी भेदभाव के कारण इंडो गयानिज हाथ पर हाथ डालकर बैठे नहीं रहे, बल्कि राजनीतिक क्षेत्र के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में परिश्रम करना प्रारंभ किए।


उन्होंने व्यापार, उद्योग, प्रशासन, कानून, चिकित्सा आदि के क्षेत्रों में अपनी मेहनत से काफी प्रगति की । डॉ. मोहम्मद शहाबुद्दीन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश बने, डॉ. हेरी अन्नमुन्थोड़ो बड़े सर्जन बने । सर श्री रामफल ने राष्ट्रमंडल में 2 वर्ष तक महासचिव के रूप में सेवा दी। रोहन कन्हाई ने अपना नाम क्रिकेट जगत में रोशन किया।


गुयाना की राजनीति में समय बदला और 1992 ई. के आम चुनाव में डॉ. छेदी जगन ने पुन: इंडो- गयानिज राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उनके चाहने वालों का मानना था कि गुयाना राष्ट्र के विकास और भलाई के लिए वे अपने प्राण से लगे थे।

अपने शासन के दौरान उन्होंने बहुत सारे रचनात्मक कार्य लागू किए। उन्होंने गुयाना के सभी लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास के बारे में सोचा। इसके साथ ही इंडो गयानिज और इंडो- अफ्रीकी लोगों के बीच के खाई को कम करने के लिए उन्हें विकास में सहभागी लोकतंत्र के तहत लाने के प्रयास किए। 1997 ई. में दुर्भाग्य से राष्ट्रपति रहते हुए छेदी जगन की मृत्यु हो गई। गुयाना के अगले आम चुनाव में 53% मत प्राप्त कर पी.पी.पी. ने चुनाव जीता और 37 वर्षीय भरत जगदेव (इंडो-गयानिज) राष्ट्रपति बनाए गए। जगदेव ने इस चुनाव में अफ्रो-गयानिज मूल के 72 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति डेसमौण्ड होयते को बहुत बड़े अंतर से हराया। इस चुनाव के बाद यह पुन: स्पष्ट हो गया कि गुयाना का समाज नस्लीय आधार पर बंटा हुआ है। जिसमें एक ओर इंडो-गयानिज तो दूसरी ओर अफ्रो- गयानिज हैं।