मुहम्मद गोरी गोर राज्य का उत्कर्ष - The heyday of Muhammad Ghori Ghor State

मुहम्मद गोरी गोर राज्य का उत्कर्ष - The heyday of Muhammad Ghori Ghor State


अफगानिस्तान में गजनी और हिरात के बीच पर्वतीय क्षेत्र में गोर एक छोटी सी जागीर थी। गोर निवासी हथियारों और युद्धीय उपकरणों के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध थे और पड़ोसी देशें में उनका निर्यात करते थे। जब सन् 1020 ई. में गजनी के सुलतान मसूद ने गोर पर आक्रमण किया तब वहाँ का शासक अबुल हसन खनफ उसके पास ढालें और कवच भेंटस्वरूप लाया था। तत्पश्चात् यहाँ शंसबानी राजवंश का राज्य स्थापित हो गया। इसका संस्थापक शंसब तुर्क था जो जुहाफ़ का वंशज था। उसने खलीफा के हाथों इस्लाम स्वीकार किया था।

खलीफा ने उसे एक ध्वज और एक प्रतिज्ञा पत्र प्रदान किया था। इससे प्रतीत होता है कि शंसब वंश के पूर्व शासक और गोर के लोग बौद्ध महायान मत के अनुयायी थे, क्योंकि अफगानिस्तान में यह धर्म अभी भी प्रचलित था और तुर्कीस्तान, बामियान तथा काबुल बौद्ध धर्म के अत्यंत सक्रिय केंद्र थे। जब गजनी के सुलतान महमूद ने सन् 1010 में गोर पर आक्रमण कर उसे जीत लिया, तब से वहाँ इस्लामी सभ्यता के सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभाव प्रारंभ हुए और गौरियों को इस्लाम की शिक्षा देने के लिए शिक्षक नियुक्त किए गए।




मुहम्मद गोरी का प्रारंभिक जीवन


गजनी के अंतिम शासक बहरामशाह ने अपनी पुत्री का विवाह गोर के तुर्क शासक कुतुबुद्दीन के साथ किया था। किंतु अपने दामाद कुतुबुद्दीन से मतभेद होने के कारण बहरामशाह ने उसका कत्ल करवा दिया। इससे गोर और गजनी के राजवंश में अधिक वैमनस्य और शत्रुता बढ़ गई। गोर के नए शासक सैफुद्दीन के बाद उसका भाई अलाउद्दीन हुसैन गोर राज्य का शासक बना। उसने अपने भाई सैफुद्दीन की पराजय और हत्या का बदला लेने के लिए गजनी पर आक्रमण किया। वह विजयी हुआ। उसने गजनी को खूब लूटा और उसे विध्वंस कर दिया। वह गोर का प्रथम शासक था, जिसने अस्सुल्तान अल मुअज्जम' (महान सुलतान) की पदवी धारण की।

उसने सन् 1152 ई. में सल्जुकी के सुल्तान को वार्षिक कर (खिराज) देना बंद कर दिया तथा गजिस्तान, बामियान तथा समीपवर्ती प्रदेशों में अपनी राजसत्ता का विस्तार किया। उसने गजनवियों और सल्जुकों के पतन का लाभ उठाकर अपने राज्य का प्रसार किया।


अलाउद्दीन हुसैन के निधन के बाद उसका पुत्र सैफुद्दीन मुहम्मद उसका उत्तराधिकारी बना, पर एक झगड़े में मारे जाने के कारण दो वर्ष की अल्प अवधि में ही उसका अंत हो गया। उसके बाद, 1163 ई. में उसका चचेरा भाई गयासुद्दीन गोर वंश के राजसिंहासन पर बैठा।

उसका छोटा भाई शहाबुद्दीन तकीनाबाद का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इस समय गजनी गुज्ज तुर्कों के अधीन था। सुलतान गयासुद्दीन ने राज्यपाल शहाबुद्दीन को गजनी पर विजय प्राप्त करने के आदेश दिए। फलतः 1173-74 ई. में शहाबुद्दीन ने गजनी पर आक्रमण कर उस पर विजय प्राप्त की। इससे प्रसन्न होकर गयासुद्दीन ने गजनी राज्य शहाबुद्दीन को दे दिया। अब शहाबुद्दीन गजनी का शासक बन गया। शहाबुद्दीन ने जिसे मुहम्मद बिनसाम भी कहते हैं, खुरासान विजय करने के बाद 'मुईजुद्दीन' का खिताब धारण किया था। यही मुईजुद्दीन भारतीय इतिहास में शहाबुद्दीन मुहम्मद गोरी के नाम से प्रसिद्ध है। अपने भाई और गोर के के शासक गयासुद्दीन की मृत्यु के बाद मुईजुद्दीन ने गोर को भी अपने अधिकार में कर लिया और उसने गोर और गजनी दोनों राज्यों को एक ही राज्य में सम्मिलित कर लिया।

गोरी ने गजनी में अपनी शक्ति दृढ़ करके, उत्तरी भारत पर आक्रमण कर अपने साम्राज्य का विस्तार किया, क्योंकि वह साम्राज्यवादी और महत्वाकांक्षी सुलतान था।


12वीं सदी ई. में भारत की स्थिति


मुहम्मद गोरी ने महमूद गजनवी के आक्रमण के लगभग 150 वर्ष बाद भारत पर आक्रमण किए। इस लंबी अवधि में भारत के राजनीतिक मानचित्र में कुछ परिवर्तन हो गए थे। राजपूत शासकों ने भारत के विभिन्न भागों में अपनी सत्ता की स्थापना कर ली थी।

भारत के पश्चिमी प्रदेशों पर गजनी के सुल्तानों का आधिपत्य था। सिंध पर सुमराओं का शासन था। इनके अतिरिक्त उत्तरी भारत में पाँच प्रसिद्ध राजपूत राज्य थे, जिनमें एकता का अभाव था। दिन प्रतिदिन उनमें संघर्ष होता रहता था, जिसके कारण उनकी सैनिक शक्ति का पतन हो रहा था। ये राज्य इस प्रकार थे-


(1) अजमेर तथा दिल्ली - अजमेर और दिल्ली के प्रदेश पर चौहान वंशीय राजपूतों का अधिकार था।


मुहम्मद गोरी के आक्रमण के समय इस समस्त प्रदेश पर पृथ्वीराज चौहान का आधिपत्य था, जो बड़ा वीर तथा प्रतापी राजा था। उसने महोबा के परमार राजा को युद्ध में पराजित किया था। 


(2) कन्नौज तथा काशी- कन्नौज तथा काशी के मध्य क्षेत्रों पर गहदवाल वंशीय राजपूतों का अधिकार था। मुहम्मद गोरी के आक्रमण के समय वह समस्त प्रदेश राजा जयचंद गहड़वाल के आधिपत्य में था। वह बड़ा वीर तथा साहसी राजा था।


(3) गुजरात - गुजरात में बघेल राजपूत राज्य करते थे। इनकी सैनिक शक्ति बड़ी दृढ़ थी।



(4) बिहार- बिहार में पाल वंश के राजाओं का अधिकार था। इनकी सैनिक शक्ति भी उन्नत थी। 


(5) बंगाल- बंगाल में सेन वंश का शासन था। मुहम्मद गोरी के आक्रमण के समय बंगाल पर राजा लक्ष्मण सेन शासन कर रहा था। वह बड़ा वीर तथा प्रतापी शासक था।


उक्त समस्त राजाओं की सैनिक शक्ति दृढ़ थी, किंतु व्यक्तिगत गौरव के कारण उनमें एकता का अभाव था। पृथ्वीराज और जयचंद में पुरानी शत्रुता थी और वे एक दूसरे को अपमानित करने की खोज में रहते थे। पृथ्वीराज ने जयचंद की कन्या संयोगिता का अपहरण कर उसके अभिमान को ठेस पहुँचाई थी। अतः जयचंद सदा पृथ्वीराज से अपने अपमान का प्रतिशोध लेने के अवसर की ताक में रहता था। जब भी उसे ऐसा अवसर प्राप्त हुआ तो उसने उसे हाथ से नहीं जाने दिया। इस प्रकार की पारस्परिक कलह के कारण समस्त देश में शासन व्यवस्था शिथिल पड़ गई थी। सामंत प्रथा के कारण जनता को विशेष कष्ट का अनुभव हुआ। राजाओं के उदासीन रहने के कारण उनकी राज-भक्ति क्षीण पड़ गई। राजाओं ने सीमांत प्रदेशों की सुरक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया और न ही विदेशी शत्रु की शक्ति को जानने का प्रयत्न किया। वास्तव में उस समय की राजनीतिक परिस्थिति बहुत ही शोचनीय थी। वह विदेशी आक्रमणकारियों के लिए सर्वथा उपयुक्त थी। उन्होंने इसका लाभ उठाकर भारत में इस्लाम धर्म की पताका फहरा दी और राजपूतों के हाथ से भारत की राज्य श्री छीन ली।