अरब आक्रमण का प्रभाव एवं महत्व - Impact and Significance of Arab Invasion
अरब आक्रमण का प्रभाव एवं महत्व - Impact and Significance of Arab Invasion
(1) राजनीतिक स्थिति पर प्रभाव
अरब आक्रमण का भारतीय तथा सिंध की राजनीतिक स्थिति पर बहुत कम प्रभाव पड़ा। उनकी यह विजय क्षणिक थी। मुहम्मद बिन कासिम की मृत्यु के कुछ समय बाद ही अरब सत्ता का अंत हो गया और पुनः शासन पर हिंदुओं का अधिकार हो गया। इस संबंध में लेनपून का कथन है, "यह विजय भारत तथा इस्लाम के इतिहास की एक अस्थायी घटना व परिणामहीन विजय थी।"
(2) सांस्कृतिक क्षेत्र में प्रभाव
अरब आक्रमण का राजनीतिक क्षेत्र में विशेष प्रभाव नहीं पड़ा,
किंतु इसके विपरीत संस्कृति के क्षेत्र में इसका बहुत अधिक महत्व है। उस समय भारतीय सभ्यता तथा संस्कृति इतनी उन्नत थी कि उसके सामने अरबवासी बिल्कुल असभ्य और बर्बर थे। अरबवासियों पर भारतीय सभ्यता तथा संस्कृति का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने भारतीय विद्वानों तथा साहित्यकारों का बड़ा आदर किया। भारतीय दर्शन, चित्रकारी आदि कलाओं के विशेषज्ञों ने भी मुसलमानों को बहुत अधिक प्रभावित किया। भारतीयों के संपर्क में जीवन व्यतीत कर उन्होंने इसका ज्ञान प्राप्त किया। एक बार खलीफा हारूल रशीद ने एक असाध्य रोग की चिकित्सा करने के लिए भारत के वैद्य को बुलाया, जिसको सफलता प्राप्त हुई।
वह भारतीय साहित्य तथा विद्वानों का आदर करता था। उसने अनेक भारतीय विद्वानों को अपनी राजधानी बगदाद में आमंत्रित किया और उनकी सहायता से विभिन्न शास्त्रों का अनुवाद अरबी भाषा में करवाया, जिनका यूरोप में अधिक प्रचार हुआ। इस प्रकार अरबवासियों के प्रयत्न के कारण ही भारत की सभ्यता तथा संस्कृति न केवल मध्य एशिया को ही, वरन् यूरोप के विभिन्न देशों को भी प्रभावित करने में सफल हुई। खलीफा मंसूर के शासन काल में भारत के बहुत से विद्वान बगदाद ले जाए गए। अरब वाले भारत से ब्रह्मा सिद्धांत तथा खंड खाद्यक' नामक ग्रंथ बगदाद ले गए, जहाँ उनका अरबी में अनुवाद किया गया।
अरबवासियों को अंकों का ज्ञान भारतीयों से प्राप्त हुआ। इसी कारण उन्होंने उसका नाम 'हिन्दसा' रखा। इस प्रकार यह कहना उचित है कि भारत मध्य काल में अरबों के गुरूपद पर आसीन था। भारतवर्ष ने अरबों को बहुत-सी विद्याओं का ज्ञान करवाया तथा उनके साहित्य तथा कला को प्रभावित किया। बाद में अरबवासियों का भारत से संपर्क कम होने लगा। वे यूनान की सभ्यता तथा संस्कृति से प्रभावित हुए किंतु उनको अपनी सभ्यता की ओर आकर्षित करने का श्रेय भारत को ही प्राप्त है। इस विषय के संबंध में इतिहासकार एच. जी. वेल्स का कथन है कि “मध्य युग में जब यूरोप में अविद्या का प्रचार था, वहाँ ज्ञान का दीपक भारत से प्राप्त करके अरब निवासियों ने जलाया।" जबकि आधुनिक शोधों के आधार पर वेल्स का कथन तर्क रहित प्रतीत होता है।
(3) धार्मिक प्रभाव
अरबों द्वारा भारत में ऐसे धर्म का प्रचार किया गया, जो सरलता तथा बंधुत्व के कारण प्रसिद्ध हुआ तथा जो एकेश्वरवाद में विश्वास करता है, किंतु हिंदुओं को अपनी सभ्यता एवं संस्कृति पर पूर्ण विश्वास था, जिसके कारण इस्लाम धर्म भारतीयों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल नहीं हुआ। केवल उन्हीं व्यक्तियों ने इस्लाम धर्म स्वीकार किया, जो इस धर्म को स्वीकार करने के लिए बाध्य किए गए थे। भारत के भावी आक्रमणकारियों को इस आक्रमण द्वारा प्रोत्साहन अवश्य प्राप्त हुआ।
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